
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रिंग रोड स्थित आइटी पार्क चौराहे पर बन रहे फ्लायओवर के निर्माण में लेटलतीफी के चलते यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। निर्माण कार्य की धीमी गति का खामियाजा रोजाना लगभग एक लाख लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पांच से छह इंच के छोटे-बड़े गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालक हिचकोले खाते हुए सर्विस रोड से निकलने को मजबूर हैं।
वाहन चालकों के लिए तय कर पाना मुश्किल हो गया है कि गड्ढों में सर्विस रोड है या सर्विस रोड में गड्ढे हैं। निर्माण के लिए बनाया गया वैकल्पिक मार्ग बदहाल है। वर्षा ने मार्ग पर वाहन चालकों की समस्या बढ़ा दी है। फ्लायओवर निर्माण कार्य मप्र रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एमपीआरडीसी) कर रहा है, लेकिन डेडलाइन छह महीने पहले खत्म हो चुकी है।
चौराहे पर ब्रिज का काम ढाई साल से जारी है, लेकिन अब तक केवल 40 से 50 फीसदी निर्माण ही पूरा हो पाया है। निर्माण कार्य के चलते भारी यातायात को सर्विस रोड पर डायवर्ट कर दिया है, लेकिन सर्विस रोड संकरी होने से रोज लगभग एक किमी तक ट्रैफिक जाम लग रहा है। वाहनों को चौराहा पार करने में आधा से पौन घंटा तक लग रहा है।
निर्माण स्थल के आसपास दोनों ओर की जर्जर सड़कों पर वाहन चालकों को गड्ढों के बीच से निकलना पड़ रहा है। तीन इमली से आइटी पार्क जाने वाले मार्ग पर जगह-जगह आधा-आधा फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं। इनसे बचकर वाहन निकालना चुनौती बन गया है। अचानक गड्ढे सामने आने पर वाहन चालक संतुलन खो देते हैं। वर्षा में गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
62 करोड़ रुपये की लागत से 830 मीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन करीब दो साल में सिर्फ 40 से 50 प्रतिशत काम ही हो पाया है। निर्माण के दौरान यातायात डायवर्ट करने से पहले वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त किया जाना था, लेकिन जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
वर्षा के बाद वैकल्पिक मार्ग की हालत और खराब हो गई है। पिछले दो साल से सुबह और शाम के समय चौराहे और आसपास के मार्गों पर वाहनों की लंबी लाइनें लग रही हैं।
आइटी पार्क की ओर राजीव गांधी की ओर जाने वाले सर्विस रोड पर वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा रहता है। यातायात नियंत्रित करने के लिए चार-पांच यातायात जवानों को तैनात करना पड़ रहा है। इसके बावजूद दिनभर यातायात प्रभावित रहता है। खराब सड़क पर कई बार वाहन आमने-सामने फंस जाते हैं। इससे यातायात पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
विभाग ने बरसात से पहले सड़क की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक स्थायी सुधार नहीं हुआ। एजेंसी ने गड्ढों में गिट्टी डालकर खानापूर्ति की है। वर्षा होते ही गिट्टी बह जाती है और गड्ढे फिर उभर आते हैं।
इस मामले में एमपीआरडीसी के डिवीजन मैनेजर गगन भाबर को कई बार कॉल किया। टेक्स्ट और व्हाट्सएप मैसेज किए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
यह भी पढ़ें- इंदौर के सांवेर में मकान ढहा... जर्जर इमारत की दीवार गिरने से 7 महिला श्रमिक दबीं, 4 की मौत, दो गंभीर