
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। लुधियाना में दूषित पानी से बीमारियों के मामले सामने आने के बाद नगर निगम ने तात्कालिक मरम्मत की बजाय संरचनात्मक सुधार पर फोकस किया। इसका सीधा लाभ यह हुआ कि शिकायतें तेजी से घटीं और भरोसा लौटा। लुधियाना में तीन साल पहले दूषित जल की 608 शिकायतें दर्ज की थी, जो 2025 में घटकर 318 रह गई। इसी अनुभव के आधार पर इंदौर के लिए कुछ ठोस सबक हैं।
पाइपलाइन का स्थायी समाधान : लुधियाना ने धीरे-धीरे ही सही, लेकिन पुरानी, जर्जर लाइनों को बदला। इंदौर में भी पैचवर्क नहीं, बल्कि ड्रेनेज के समानांतर चल रही पुरानी जल लाइनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नई लाइनें बिछानी होंगी।
लीकेज की जीरो-टालरेंस नीति : लुधियाना ने लीकेज को छोटी खराबी मानने के बजाय हेल्थ इमरजेंसी माना। इंदौर में हर लीकेज की 24-48 घंटे में मरम्मत की सीमा तय हो।
नियमित और पारदर्शी सैंपलिंग : वार्ड-वार साप्ताहिक सैंपलिंग, रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो।
सीवेज-पेयजल का पूर्ण पृथक्करण : जहां भी दोनों लाइनें साथ चलती हैं, वहां प्राथमिकता से रीरूटिंग हो। यही मूल रोकथाम है।
दूषित पानी से हुई मौतों पर कांग्रेस का प्रदर्शन 11 जनवरी को
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के खिलाफ कांग्रेस ने एक निरंतर आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जब तक नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा नहीं होता, कांग्रेस आंदोलन जारी रखेगी।
शनिवार को भागीरथपुरा में कांग्रेस नेताओं को रोकने के मामले में पटवारी ने विजयवर्गीय को सभी घटनाओं का सरगना बताया। वहीं कांग्रेस ने 11 जनवरी को भागीरथपुरा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए न्याय यात्रा निकालने की घोषणा की है।
यह यात्रा बड़ा गणपति मंदिर से राजवाड़ा तक जाएगी, जिसमें प्रदेश के सभी बड़े कांग्रेस नेता और सभी विधायक शामिल होंगे। रविवार को गांधी भवन में आयोजित बैठक में कांग्रेस ने आंदोलन की रूपरेखा तय की। इस बैठक की अध्यक्षता पटवारी ने की, जिसमें राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी की इंदौर प्रभारी उषा नायडू, पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष शोभा ओझा, पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। पटवारी ने कांग्रेसियों को रोकने की कोशिश और पुलिस के रवैये की आलोचना की।