
डिजिटल डेस्क, इंदौर। आज 2 अक्टूबर गांधी जयंती है, इस मौके पर जानिए MP से बापू का गहरा नाता। महात्मा गांधी पहली बार 28 मार्च 1918 को इंदौर आए थे, ये उनकी मध्यप्रदेश की पहली यात्रा थी। इसी यात्रा के बाद भारत में गांधी युग शुरू हुआ। इंदौर आने से पहले वे चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में सफल आंदोलन कर चुके थे।
महात्मा गांधी जी पहली बार 28 मार्च 1918 को इंदौर आए थे और यह मध्यप्रदेश की उनकी पहली यात्रा थी। इंदौर आने से पहले चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में गांधीजी के आंदोलनों को काफी पॉपुलैरिटी मिल चुकी थी। इंदौर यात्रा के बाद ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में 'गांधी युग' का सूत्रपात हुआ, जो 1919 के बाद का काल माना जाता है।
.jpg)
गांधी जब इंदौर आए तब दक्षिण अफ्रीका में उनका काम पूरा हो चुका था। वे 21 साल तक अफ्रीका में रहकर लौटे थे। इंदौर यात्रा के साथ और उसके बाद ही उनके मन में ये बात पक्की हो गई थी कि अब भारत में रहकर ही भारत की आजादी के लिए संघर्ष करना है।
दूसरा, इंदौर यात्रा तक वे पूरे देश में 'महात्मा' के रूप में स्वीकार किए जा चुके थे। उनकी असाधारण और विलक्षण अहिंसक शक्ति के बारे में पूरा देश आश्वस्त हो चुका था। तीसरी बात ये कि बापू के इंदौर आने से पहले ही पहला विश्वयुद्ध खत्म हो चुका था और इसलिए लोग हिंसा मुक्त समाज चाहते थे। ये तीन संदर्भ इंदौर यात्रा से जुड़े हैं।
महात्मा गांधी इंदौर में हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति के तौर पर पधारे थे। इंदौर में उनकी तीन दिन की यात्रा थी। महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में जिन मुद्दों को उठाया था, वे हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने और दक्षिण में, खास तौर पर तमिलभाषियों में हिंदी के प्रचार-प्रसार से संबंधित थे।
जब गांधीजी 28 मार्च को इंदौर पहुंचे थे तो जनता पलक-पांवड़े बिछाकर उनका इंतजार कर रही थी। हजारों की संख्या में स्वयंसेवक और दर्शनार्थी गांधीजी के इंतजार में थे। गांधीजी हमेशा रेल के तीसरे दर्जे के डिब्बे में सफर करते थे। उनका मानना था कि अगर भारत को पहचानना है तो थर्ड क्लास में ही सफर करना चाहिए। जब गांधीजी स्टेशन पर उतरे तो लोग उनकी सादगी देखकर हैरान रह गए।
इंदौर आगमन की एक और खास बात ये थी कि लोगों ने गांधीजी के मना करने के बाद भी उनकी बग्गी के घोड़ों को अलग कर दिया और खुद उनकी बग्गी खींची। ये इंदौर की जनता का बापू के प्रति प्यार और सम्मान था।
गांधीजी की दूसरी MP यात्रा 20 और 21 दिसंबर 1920 को हुई थी। इस यात्रा के दौरान गांधीजी रायपुर, धमतरी, कंडेल और कुरूद अंचल में पहुंचे थे। गांधीजी के छत्तीसगढ़ की यात्रा पर आने का मकसद ही सत्याग्रह के प्रति वहां की जनता की निष्ठा थी। विशाल स्तर पर कंडेल नहर सत्याग्रह, प्रदेश में आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कंडेल मध्यप्रदेश का संभवतः पहला ऐसा गांव था जहां गांधीजी ने सत्याग्रहियों को आशीर्वाद दिया था।
- पहली यात्रा- 28 मार्च 1918 को इंदौर की
- दूसरी यात्रा- 20-21 दिसंबर 1920 को रायपुर, धमतरी, कंडेल की
- तीसरी यात्रा- छिंदवाड़ा में 6 जनवरी 1921
- चौथी यात्रा- सिवनी-जबलपुर में 20 और 21 मार्च 1921
- पांचवीं यात्रा- खंडवा में मई 1921 में
- छठी यात्रा- भोपाल और सांची - सितंबर 1929
- सातवीं यात्रा- 22 नवंबर से 8 दिसंबर 1933 में MP के कई शहरों की
- आठवीं यात्रा- 20 अप्रैल 1935 को इंदौर की
- नौवीं यात्रा- जबलपुर और भेड़ाघाट की- फरवरी 1941 में
- दसवीं यात्रा- जबलपुर की 27 अप्रैल 1942 को