
लोकेश सोलंकी, नईदुनिया इंदौर। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध की खपत इंदौर में मानी जाती है। जबकि शहर में आ रहे दूध की गुणवत्ता पर चौकसी का सिस्टम 30 साल से ठप है। हाई कोर्ट इस संबंध में आदेश जारी कर चुका है।
दूध विक्रेताओं ने खुद जांच की मांग उठाई। बावजूद प्रशासन एंट्री पाइंट पर निगरानी का सिस्टम लागू नहीं कर रहा है। त्योहारों के दौरान खपत और बढ़ेगी, ऐसे में मिलावट का खतरा भी बढ़ जाएगा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पिछले साल दूध में मिलावट ना रोक पाने पर प्रशासन के रवैये को लापरवाह बताते हुए फटकार लगाई थी।
कोर्ट ने छह बिंदुओं के निर्देश दिए थे। इसमें सभी कलेक्टरों को आदेशित किया था कि एंट्री और एक्जिट पाइंट पर जांच नाके बनाए जाएं। साथ ही मोबाइल टेस्टिंग लैब, सैंपलिंग और कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे।

इसी आदेश का हवाला देते हुए इंदौर दूध विक्रेता संघ ने कलेक्टर को लिखित पत्र सौंपा है। दूध विक्रेता संघ ने मांग की है कि शहर की सीमाओं पर दूध की जांच शुरू की जाए। इसके साथ हाई कोर्ट के आदेश की प्रति भी है।
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30 साल पहले तक शहर की सीमाओं पर ही दूध की सैंपलिंग होती थी। बाद में बंद कर दी गई। अब इंदौर में निमाड़ क्षेत्र, देवास, उज्जैन, नागदा के गांवों तक से दूध आता है। शहर बढ़ा है, खपत बढ़ी है ऐसे में जांच नाके बनाकर फिर से पुराना सिस्टम लागू करना जरूरी है। - भरत मथुरावाला, अध्यक्ष इंदौर दूध विक्रेता संघ