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इंदौर में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए कतार में 218 मरीज, 189 को किडनी और 29 को लीवर की जरूरत, नेटवर्क का होगा विस्तार

इंदौर में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए नेटवर्क अब 13 से अधिक अस्पतालों तक बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही ब्रेन डेथ के संभावित मामलों में स्वजन की समय पर का...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 04:06:23 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Aug 2026 05:09:57 PM (IST)
इंदौर में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए कतार में 218 मरीज, 189 को किडनी और 29 को लीवर की जरूरत, नेटवर्क का होगा विस्तार
ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए बढ़ाया जा रहा नेटवर्क

HighLights

  1. इंदौर में बढ़ाया जाएगा ऑगर्न ट्रांसप्लांट का दायरा
  2. 13 से अधिक अस्पतालों तक बढ़ाया जाएगा नेटवर्क
  3. अंगदान के लिए 218 मरीज कर रहे इंतजार

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए नेटवर्क अब 13 से अधिक अस्पतालों तक बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही ब्रेन डेथ के संभावित मामलों में स्वजन की समय पर काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा। सोमवार को संभागायुक्त भास्कर लक्षकार की अध्यक्षता में हुई बैठक में इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन ने यह निर्णय लिया। बैठक में बताया गया कि शहर में अभी 218 मरीज प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में हैं। इनमें 189 मरीजों को किडनी और 29 मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है। समय पर जानकारी नहीं देने वाले अस्पतालों को नोटिस जारी किए जाएंगे।

बैठक में जानकारी दी गई कि शहर में औसतन रोजाना पांच दुर्घटनाजनित मौतें होती हैं। ट्रॉमा और कार्डियक डेथ में मुख्य रूप से आंख और त्वचा ही दान की जा सकती है। ऐसे में ब्रेन डेथ के संभावित मामलों की जल्द पहचान कर स्वजन से प्रभावी संवाद और काउंसलिंग को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि जीवन रक्षक अंग समय रहते सुरक्षित किए जा सकें।


सोसायटी की स्थापना 2013-14 में हुई थी। अब तक 1090 त्वचा दान और विभिन्न आई बैंक के माध्यम से करीब 17 हजार नेत्रदान कराए जा चुके हैं। दिसंबर 2025 तक इंदौर में 69 ग्रीन कारिडोर बनाए गए, जिनके जरिए 105 किडनी, 53 लिवर, 20 हार्ट और पांच फेफड़े जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाए गए।

इसमें सूरत और भोपाल के साथ अंगों का आदान-प्रदान भी शामिल है। बैठक में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर अरविंद घनघोरिया, संभागीय चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर पूर्णिमा गड़रिया, एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अशोक यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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डॉक्टरों की जिम्मेदारी होगी तय

सोसायटी में वालंटियर भर्ती कर उन्हें संवाद कौशल, राष्ट्रीय नोटो और सोटो की गाइडलाइन और काउंसलिंग प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये वालंटियर अस्पतालों और सोटो के साथ समन्वय कर ब्रेन स्टेम डेथ के मरीजों के स्वजन की काउंसलिंग करेंगे। नामित अस्पतालों में ऐसे डॉक्टर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जो अपने नियमित कार्य के साथ अंगदान-प्रत्यारोपण संबंधी कार्यों के लिए भी समय देंगे।

रिकॉर्ड रखना अनिवार्य

अब अंग उपलब्धता संबंधी अलर्ट स्थानीय अस्पताल नेटवर्क के बजाय राष्ट्रीय नोटो वेबसाइट से सीधे जारी होंगे। अस्पतालों और सोसायटी को अलर्ट, संवाद और प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों की सत्यापित सहमति सहित पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड रखना होगा। संभागायुक्त ने नियामकीय व्यवस्था की समीक्षा के साथ हर माह प्रगति बैठक करने के निर्देश दिए।

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