MP Elections 2023: जागते रहो, सियासत चाहती है आपको मीठे सपनों में मदहोश रखना
MP Elections 2023: अपने मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस से सवाल जरूर पूछिए।
By Sameer Deshpande
Edited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Thu, 21 Sep 2023 10:33:17 AM (IST)
Updated Date: Thu, 21 Sep 2023 10:34:38 AM (IST)
विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने में अब भी वक्त शेष है।HighLights
- राजनीतिक दलों ने प्रदेश का माहौल पूरी तरह चुनावी बना दिया है।
- मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए भाजपा जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रही है तो कांग्रेस जन आक्रोश यात्रा।
- दोनों दल उन वादों पर मौन धारण किए हुए हैं जो उन्होंने पिछले चुनावों में किए थे।
MP Elections 2023: सदगुरु शरण, इंदौर। विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने में अब भी वक्त शेष है यद्यपि राजनीतिक दलों ने प्रदेश का माहौल पूरी तरह चुनावी बना दिया है। इससे इन दलों, खासकर भाजपा और कांग्रेस की सत्ता पाने की छटपटाहट समझी जा सकती है। मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए भाजपा जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रही है तो कांग्रेस जन आक्रोश यात्रा।
स्वाभाविक रूप से इन यात्राओं का नेतृत्व कर रहे दोनों दलों के दिग्गज नेता एक-दूसरे पर न सिर्फ कीचड़ उछाल रहे बल्कि मतदाताओं के मुंह में मिठास घोलने वाले वादे भी कर रहे हैं। बहाहाल, दोनों दल उन वादों पर मौन धारण किए हुए हैं जो उन्होंने पिछले
चुनावों में किए थे। चूंकि पिछले अधिकतर वादे पूरे नहीं हुए इसलिए दोनों दल उन पर चर्चा नहीं करना चाहते। उन वादों पर मतदाताओं का ध्यान न जाए, इसके लिए भावनात्मक बातें की जा रही हैं। राजनीतिक दलों की कोशिश है कि मतदान होने तक वादों की लोरियां सुना-सुनाकर मतदाताओं को मीठे सपनों की नींद में मदहोश रखा जाए।
दो राय नहीं कि पिछले 20 वर्षों में
मध्य प्रदेश का किसी हद तक कायाकल्प हुआ है। 2003 तक 'बीमारू' प्रदेशों के क्लब में शामिल यह प्रदेश अब कृषि, औद्योगिक निवेश, खेल, नारी सशक्तीकरण, स्वरोजगार खासकर स्टार्टअप और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में चैंपियन प्रदेशों के साथ मुकाबला कर रहा है। स्वच्छता के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियां चमत्कृत करने वाली हैं। इसके बावजूद शिक्षा एवं शोध, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सार्वजनिक परिवहन, पारदर्शी प्रशासन, गरीबी और सामाजिक गैर-बराबरी आदि कई महत्वपूर्ण विषय हैं जिन पर अपेक्षानुसार प्रगति नहीं हुई।
सवाल पूछें...नजर क्यों नहीं आए
प्रदेश में सत्तासीन रहे दल नहीं चाहते कि ये विषय चुनावी मुद्दा बनें, इसलिए मतदाताओं की जिम्मेदारी है कि अपने इन मुद्दों पर खुद चर्चा करें। अगले महीने नामांकन होते ही उम्मीदवार वोट मांगने आपके दरवाजे पहुंचेंगे। आप वे तमाम कष्ट, असुविधाएं और अत्याचार याद रखिए जो आपने भोगे। विधायक जी या उनके समर्थक वोट मांगने आएं तो उनसे निसंकोच पूछिए कि जब आप कष्ट में थे, उस वक्त वे कहां थे? पिछले चुनाव में जो वादे किए थे, उनका क्या हुआ? विधायक जी ने क्षेत्र की समस्याओं के मुद्दे विधानसभा में क्यों नहीं उठाए? आपको दलबदल पर भी सवाल पूछना चाहिए। मतदाताओं ने उन्हें जिस पार्टी के लिए चुना था, उसे उन्होंने मतदाताओं की अनुमति प्राप्त किए बिना क्यों छोड़ दिया? विधायक जी पांच साल नजर क्यों नहीं आए?
राजनीतिक विचार-विमर्श में सक्रिय रहे
सोच-विचार करने पर ऐसे तमाम सवाल सामने आकर खड़े हो जाएंगे जो आपको राजनीतिक दलों से पूछने चाहिए। यह आपकी जिम्मेदारी है। यदि आप किसी भावना में बहकर सवाल पूछने में संकोच करेंगे तो आपको अगले पांच साल शिकायत करने का नैतिक अधिकार नहीं मिलेगा। मध्य प्रदेश विकास के ऐसे संक्रमणकाल से गुजर रहा है जहां राजनीतिक स्थायित्व और जन प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद अहम है। इसलिए यह आवश्यक है कि हर मतदाता चुनाव प्रक्रिया के दौरान तटस्थता या उदासीनता छोड़कर राजनीतिक विचार-विमर्श में सक्रिय रहे।
हमें श्रेष्ठ दल और उम्मीदवार का चयन करना होगा ताकि अगली सरकार भी मध्य प्रदेश को विकास की राह पर मजबूती के साथ लेकर आगे बढ़े। हमें यह विचार जरूर करना चाहिए कि लक्ष्य के मुताबिक वर्ष 2047 में जब भारत विकसित राष्ट्रों की कतार में खड़ा होगा, उस वक्त मध्य प्रदेश कहां खड़ा होगा? कृषि और व्यापार अनुकूल प्रकृति के बावजूद मध्य प्रदेश विकास की दौड़ में पिछड़ गया तो इसके लिए राजनीतिक नेतृत्व से अधिक जिम्मेदार आम मतदाता होंगे। इसलिए जागृत रहिए। आपका मताधिकार अति-मूल्यवान है। इसके सार्थक इस्तेमाल के लिए अभी से तैयारी करिए।