लैंड यूज बदलने के साथ मास्टर प्लान भी बना सकेगी मध्य प्रदेश में मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी
मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के लिए बड़े अधिकार दे दिए हैं।
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 10:09:10 AM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 10:14:28 AM (IST)
इंदौर में राजबाड़ा क्षेत्र का एरियल व्यू। फाइल फोटोHighLights
- नए नियमों के तहत 40 हेक्टेयर से ऊपर की जमीन पर लैंड यूज बदला जा सकेगा
- इसके लिए प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपये फीस और 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा
- इसके साथ ही आपत्तियां और सुझाव के लिए विज्ञापन देना अनिवार्य होगा
डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के बाद इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटिन इलाकों में योजनाओं को मंजूरी देने में बड़े बदलाव हुए हैं। जिसमें अब शहरों के विकास प्राधिकरणों को बिना मंत्रालय की अनुमति के लिए क्षेत्र में विकास के लिए नई योजनाएं बनाने के अधिकार होंगे।
हाल ही में इंदौर में विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने ग्राम निवेश अधिनियम से मिले अधिकारों से कई टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) भी लागू की हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में भी इसी अधिकार के जरिए काम होगा।
सबसे खास बात है कि इंदौर, भोपाल, शाजापुर, देवास, धार, उज्जैन, रायसेन और सीहोर में कई बड़े विकास कार्यों तेजी से के साथ होंगे। इन्हें मंत्रालय की मंजूरी के लिए ज्यादा समय नहीं गंवाना होगा।
मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी को दिए गए हैं ये अधिकार
- 40 हेक्टेयर से ऊपर की जमीन पर ही लैंड यूज में बदलाव किया जा सकेगा।
- इसके लिए प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपये की फीस भी देनी पड़ेगी।
- इसके बाद इलाके में गाइडलाइन के अनुसार 15 प्रतिशत शुल्क भी देना होगा।
- लैंड यूज में बदलाव के लिए सुझाव और आपत्तियां भी मांगना होंगे, इसके लिए विज्ञापन देना होगा।
शहरों में ट्रैफिक की जिम्मेदारी
शहरों में बढ़ते ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए इंदौर-उज्जैन और भोपाल में एक मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी भी बनेगी। इसमें कई बड़े अधिकारी शामिल होंगे जो मिलकर क्षेत्र में इसके लिए योजना बनाएंगे।
पद से हटा सकेगी एमपी सरकार
- अगर यह सामने आया है कि अथॉरिटी में शामिल किसी सदस्य को निजी ऑर्थिक हित प्राप्त हुआ है, ऐसे में उसे हटाया जा सकेगा।
- साथ ही सदस्य को खुद ही अथॉरिटी की बैठक में शामिल होना होगा, वे किसी और को इसमें शामिल होने नहीं भेज सकेंगे।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी की परियोजनाओं में ऑनलाइन टेंडर के जरिए पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
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