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लाड़ली बहना योजना पर बड़ा अपडेट... एमपी सरकार इंपैक्ट टेस्ट से करेगी गहन पड़ताल, स्कीम पर पहली बार होगा सामाजिक अध्ययन

Ladli Behna Yojana: मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के दो वर्ष पूरे होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार पहली बार इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का विस्तृत अध्य...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 02 Aug 2026 06:18:11 PM (IST)Updated Date: Mon, 03 Aug 2026 08:09:15 AM (IST)
लाड़ली बहना योजना पर बड़ा अपडेट... एमपी सरकार इंपैक्ट टेस्ट से करेगी गहन पड़ताल, स्कीम पर पहली बार होगा सामाजिक अध्ययन
लाड़ली बहना योजना की होगी गहन पड़ताल

HighLights

  1. महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर फोकस
  2. शिक्षा और स्वास्थ्य का होगा आकलन
  3. वंचित पात्र महिलाओं की होगी पहचान

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Scheme) को शुरू हुए दो वर्ष पूरे होने के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन कराने जा रही है। अब तक योजना को लेकर सबसे अधिक चर्चा हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता और लाभार्थी महिलाओं की संख्या को लेकर होती रही है, लेकिन पहली बार यह जानने की कोशिश होगी कि इस योजना ने महिलाओं के जीवन में कितना सामाजिक और आर्थिक बदलाव किया है।

इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIIGGPA) से योजना का विस्तृत सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराया जाएगा। अध्ययन में यह पता लगाया जाएगा कि योजना के तहत मिलने वाली राशि महिलाओं द्वारा किन जरूरतों पर खर्च की जा रही है, उनकी आर्थिक स्थिति में कितना सुधार आया है और इसका परिवार पर क्या प्रभाव पड़ा है।


महिलाओं के जीवन में आए बदलाव का होगा मूल्यांकन

यह अध्ययन केवल इस बात तक सीमित नहीं रहेगा कि योजना की राशि लाभार्थियों के खातों तक पहुंच रही है या नहीं। इसके तहत यह भी देखा जाएगा कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में कितना सुधार हुआ, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च में क्या बदलाव आया, स्वरोजगार के अवसर बढ़े या नहीं और घरेलू वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी कितनी मजबूत हुई। इसके अलावा अध्ययन में उन पात्र महिलाओं की भी पहचान की जाएगी, जो किसी कारणवश अभी तक योजना का लाभ नहीं ले पा रही हैं।

महाराष्ट्र और ओडिशा के अध्ययन से मिली दिशा

हाल ही में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहीण योजना और ओडिशा की सुभद्रा योजना का देश का पहला वैज्ञानिक प्रभाव अध्ययन प्रकाशित किया है। इस अध्ययन में वास्तविक बैंकिंग लेनदेन के आधार पर यह विश्लेषण किया गया कि प्रत्यक्ष नकद सहायता का महिलाओं के जीवन पर क्या असर पड़ा।

दूसरे राज्यों में सामने आए सकारात्मक नतीजे

अध्ययन में पाया गया कि महाराष्ट्र और ओडिशा में महिलाओं के बैंक खातों में बचत बढ़ी। मासिक खर्च में भी वृद्धि दर्ज की गई। डिजिटल भुगतान, विशेष रूप से यूपीआई का उपयोग पहले की तुलना में अधिक हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़े खर्चों में भी सुधार देखने को मिला। एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी रहा कि महिलाओं के हाथ में नियमित आय आने से परिवार के अन्य सदस्यों के वित्तीय व्यवहार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

मध्य प्रदेश किन सवालों के जवाब तलाशेगा

मध्य प्रदेश सरकार का अध्ययन यह पता लगाएगा कि योजना से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया है। इसके साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि घरेलू खर्च की प्राथमिकताएं कैसे बदलीं, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ा, स्वरोजगार को कितना बढ़ावा मिला और वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी कितनी बढ़ी। अध्ययन में योजना से वंचित पात्र महिलाओं की स्थिति का भी विश्लेषण किया जाएगा।

दो साल बाद क्यों जरूरी हुआ अध्ययन

सरकार का मानना है कि योजना के दो वर्ष पूरे होने के बाद इसके प्रभाव का आकलन आवश्यक है। अब तक लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। ऐसे में सरकार यह जानना चाहती है कि यह राशि केवल खर्च हुई या इससे महिलाओं के जीवन स्तर में स्थायी बदलाव भी आया। इस अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य में योजना के विस्तार और सुधार के लिए आधार बनेंगे।

देश में तेजी से बढ़ा महिला डीबीटी मॉडल

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 तक देश के 15 से अधिक राज्यों में महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद सहायता (डीबीटी) योजनाएं संचालित हो रही हैं। इन योजनाओं से करीब 12 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जबकि राज्यों का कुल वार्षिक व्यय लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह मापना भी जरूरी है कि इन योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में कितना वास्तविक बदलाव किया है।

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लाड़ली बहना योजना की तीन बड़ी बातें

  1. योजना की शुरुआत वर्ष 2023 में बड़े स्तर पर की गई।
  2. वर्तमान में करीब 1.25 करोड़ महिलाएं इसका लाभ ले रही हैं।
  3. पहली बार योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का संस्थागत अध्ययन कराया जाएगा।

योजना एक नजर में

  • शुरुआत: 2023
  • मासिक सहायता: 1500 रुपये
  • पात्रता: 21 से 60 वर्ष, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक
  • 2025-26 का बजट: 18,669 करोड़ रुपये