• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला... तत्कालीन CEO भूपेंद्र सिंह भाटी की FIR निरस्त करने से इनकार

इस संबंध में प्रस्तुत याचिका निरस्त करते हुए कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया जाना संभव नहीं है। जब अपराध कि सामग्री उपलब्ध हो तो ज...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 19 Feb 2026 08:22:44 PM (IST)Updated Date: Thu, 19 Feb 2026 08:22:44 PM (IST)
MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला... तत्कालीन CEO भूपेंद्र सिंह भाटी की FIR निरस्त करने से इनकार
MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

HighLights

  1. आय से अधिक संपत्ति मामले में भाटी की याचिका खारिज
  2. लोकायुक्त की कार्रवाई को रोकने से हाई कोर्ट का साफ इनकार
  3. स्वर्ण और हीरों की बरामदगी के बाद अब चलेगा केस

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआइआर निरस्त करने से इंकार कर दिया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने इस संबंध में प्रस्तुत याचिका निरस्त करते हुए कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया जाना संभव नहीं है। जब अपराध कि सामग्री उपलब्ध हो तो जांच एवं अभियोजन को रोका नहीं जा सकता।

लोकायुक्त की छापेमारी में मिला था स्वर्ण और हीरों का खजाना

लोकायुक्त ने तत्कालीन अनुसूचित जाति विकास निगम के सीईओ भूपेंद्र सिंह भाटी के भोपाल स्थित निवास पर 14 अक्टूबर 2012 को कार्रवाई की थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में स्वर्ण, हीरे के आभूषण और अन्य संपत्तियां मिली थीं। इसके आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने भूपेंद्रसिंह भाटी के खिलाफ भष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था।


गणना की त्रुटियों का हवाला देकर मांगी थी राहत

वर्ष 2019 में लोकायुक्त को भाटी के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति भी मिल गई। भाटी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें गणना संबंधी त्रुटियों का हवाला देकर एफआइआर निरस्त करने की मांग की थी। कोर्ट ने याचिका निरस्त करते हुए स्पष्ट कहा कि एफआइआर निरस्त करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। प्रकरण में लोकायुक्त की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना प्रसाद ने पैरवी की।

यह भी पढ़ें- इंदौर में ऑपरेशन के दौरान महिला के शरीर में पेट में छोड़ा उपकरण, डॉक्टर को देने होंगे पांच लाख रुपये