
नईदुनिया प्रतिधिनि, इंदौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर में धड़ल्ले से हो रहे बोरिंग को लेकर चिंता जताई है। इस संबंध में प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई ने नगर निगम और शासन से कहा है कि वे बताएं कि इस दिशा में उन्होंने क्या प्रयास किए हैं। कोर्ट ने शासन और निगम को इसके लिए एक दिन का समय दिया है। याचिका में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका एडवोकेट रितेश ईनाणी ने दायर की है। उन्होंने कहा है कि अल्पवर्षा के बाद शहर में जल संकट के हालात बन गए हैं। जल संकट की आशंका के चलते पूरे जिले में धड़ल्ले से बोरिंग हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे प्रदेशभर की बोरिंग मशीनें इंदौर आ गई हैं।
अंधाधुंध हो रहे बोरिंग की वजह से भू-जल स्तर और नीचे जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। नगर निगम और शासन बोरिंग पर रोक लगाने के बजाय मूक दर्शक बने खड़े हैं। याचिका में नए बोरिंग कराने पर सख्ती से रोक लगाने के साथ-साथ पानी बचाने के अन्य प्रभावी उपाय करने के आदेश देने की मांग भी की गई है।
एडवोकेट ईनाणी ने बताया कि गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न सिर्फ जलसंकट को लेकर चिंता जताई बल्कि निगम और शासन से स्थिति स्पष्ट करने के लिए भी कहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए ही कोर्ट ने निगम और शासन से एक दिन में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहते हुए अगली सुनवाई शुक्रवार को तय कर दी।
इंदौर में लगभग सवा लाख बोरिंग हैं। इनमें नगर निगम के छह हजार बोरिंग भी शामिल हैं। फिलहाल शहर में नए बोरिंग पर कोई रोक नहीं है। अल्पवर्षा के बाद शहर में जहां-तहां बोरिंग कराए जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक रोजाना 150 से ज्यादा नए बोरिंग हो रहे हैं।
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