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इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था पर एमपी हाईकोर्ट के जज ने कहा- रेड लाइट तोड़ बाइक सवार आया और पुलिस देखती रही

MP High Court: न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने कहा कि मेरे सामने रेड लाइट तोड़कर बाइक सवार आया और कार के पास गाड़ी खड़ी कर दी। मौके पर पुलिसकर्मी था, लेक...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 09:15:18 AM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 09:23:29 AM (IST)
इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था पर एमपी हाईकोर्ट के जज ने कहा- रेड लाइट तोड़ बाइक सवार आया और पुलिस देखती रही
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ। फाइल फोटो

HighLights

  1. कोर्ट ने इंदौर की यातायात पुलिस से पूछा - कितने चालान बने, कितने वाहन पकड़े
  2. याचिकाकर्ता ने बताया ट्रैफिक के लिए 881 पद स्वीकृत हैं, पर 660 ही तैनात हैं
  3. कोर्ट ने पहले 24 घंटे सिग्नल चालू रखने और व्यस्त चौराहों पर तैनाती के आदेश दिए थे

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर के बदहाल यातायात को लेकर मंगलवार को हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने शहर में यातायात नियमों के खुलेआम उल्लंघन का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि हालत यह है कि रेड लाइट तोड़कर बाइक सवार आया और उसने मेरी कार के पास में गाड़ी खड़ी कर दी। पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद था, लेकिन उसने कुछ नहीं किया।

कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरों को लेकर शासन के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सीसीटीवी कैमरों से ही काम चलाना है तो फिर सड़क पर पुलिसकर्मियों की आवश्यकता क्या है। पुलिसकर्मियों के रिक्त पद, बल की कमी, बंद सीसीटीवी कैमरे, बंद ट्रैफिक सिग्नल, गड्ढे और जलभराव के फोटो अपलोड करने की व्यवस्था को लेकर कोर्ट ने शासन से जवाब मांगा है।


कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगली सुनवाई तक शासन का जवाब नहीं आया तो गृह विभाग प्रमुख सचिव को कोर्ट में स्वयं उपस्थित होकर बताना होगा कि देरी की वजह क्या है। मामले में अब आठ सितंबर को सुनवाई होगी।

शहर के बदहाल यातायात को लेकर हाई कोर्ट में पांच जनहित याचिकाएं चल रही हैं। इनमें राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि सिग्नल का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

कितने चालान बनाए, कितनी गाड़ी पकड़ी

कोर्ट ने यातायात पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और अधिकारियों से पूछा कि कितने चालान बनाए, कितने वाहन पकड़े, नियम तोड़ने वालों पर क्या कार्रवाई की, लेकिन वे कोई जवाब नहीं दे सके। एडिशनल डीसीपी विक्रमसिंह रघुवंशी ने सीसीटीवी कैमरों की जानकारी दी तो कोर्ट ने सवाल किया कि कैमरों से यातायात व्यवस्था संभल सकती है तो पुलिसकर्मियों को चौराहों पर खड़ा करने की क्या आवश्यकता है।

ज्यादातर कैमरे बंद पड़े

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि पुलिस सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कर रही है, लेकिन जो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, उनमें से अधिकांश काम ही नहीं करते। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि ट्रैफिक के लिए स्वीकृत पुलिस जवानों की संख्या 881 है, जबकि केवल 660 ही तैनात हैं।

गड्ढों पर निगम ने कहा- काम कर रहे हैं

मंगलवार को सुनवाई के दौरान निगम ने बताया कि 10 जुलाई के आदेश के बाद इस सुविधा को एप पर उपलब्ध कराने के लिए संबंधित एजेंसी को निर्देश दे दिए हैं। दो से तीन सप्ताह में सुविधा को शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने गड्ढों को भरने के लिए भी लगातार काम करने की बात कही।

सिग्नल की टाइमिंग को लेकर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान व्यस्त चौराहों पर सिग्नल की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठे। याचिककर्ता ने बताया कि सिग्नल 20 से 23 सेकंड के लिए ग्रीन होते हैं। कोर्ट ने 24 घंटे ट्रैफिक सिग्नल चालू रखने और व्यस्त समय में प्रमुख चौराहों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती के आदेश दिए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कोर्ट के आदेशों पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा।

दो सप्ताह में जवाब दें

कोर्ट ने शासन द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक जवाब नहीं आया तो प्रमुख सचिव, गृह विभाग को व्यक्तिगत रूप से देरी की वजह बतानी होगी।

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