MP हाई कोर्ट ने दुर्लभ बीमारी से जूझ रही बच्ची के इलाज में देरी पर दिल्ली AIIMS से जवाब मांगा, इलाज के लिए 9.50 करोड़ की जरूरत, अमेरिका से मंगाना होगा इंजेक्शन
हाई कोर्ट ने कहा, मामले की गंभीरता को देखते हुए जवाब निश्चित रूप से 23 जुलाई 2026 तक दाखिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 27...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 17 Jul 2026 05:30:42 PM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2026 05:57:03 PM (IST)
HighLights
- दिल्ली AIIMS का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने फिर मांगा समय
- कोर्ट ने पूछा था क्या राज्य सरकार से इलाज में मदद कर सकती है
- बच्ची के परिवार ने अब तक लगभग 8 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) को निर्देश दिया है कि वह स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप 2 नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित तीन साल की बच्ची का इलाज शुरू करने में कथित देरी पर एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करे।
हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस संदीप एन भट्ट ने गुरुवार को तीन साल की अनिका शर्मा द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
दिल्ली AIIMS का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने फिर मांगा समय
सुनवाई के दौरान, दिल्ली AIIMS का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से फिर से समय मांगा। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने इस अनुरोध का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इंदौर की रहने वाली बच्ची के इलाज के लिए पर्याप्त धनराशि जमा होने के बावजूद, दिल्ली AIIMS उसके इलाज में देरी कर रहा है।
कोर्ट ने पूछा था क्या राज्य सरकार से इलाज में मदद कर सकती है
हाई कोर्ट ने कहा, मामले की गंभीरता को देखते हुए जवाब निश्चित रूप से 23 जुलाई 2026 तक दाखिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 27 जुलाई तय की है। हाई कोर्ट ने इससे पहले 22 जून को केंद्र सरकार से जवाब मांगा था और राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि क्या वह बच्ची के इलाज में कोई मदद कर सकती है।
बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ की आवश्यकता
हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया था कि SMA टाइप 2 से पीड़ित बच्ची को तत्काल इलाज की जरूरत है। याचिकाकर्ता की वकील चंचल गुप्ता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। गुप्ता ने कहा कि बच्ची के परिवार ने अब तक लगभग 8 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा मंजूर 50 लाख रुपये और विभिन्न व्यक्तियों व सामाजिक संगठनों का योगदान शामिल है।
इलाज के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाना होगा
वकील ने कहा, बच्ची के इलाज के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाना होगा। यह इंजेक्शन मंगाया जाना चाहिए और उसका इलाज जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि हर गुजरता दिन उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ा रहा है।
क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है। इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) में मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी आती है और वे खराब होने लगती हैं। मोटर न्यूरॉन्स खास तरह की नर्व सेल्स होती हैं जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी में पाई जाती हैं।
ये दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक अलग-अलग कामों के लिए मैसेज पहुंचाती हैं। जैसे सांस लेना, कुछ निगलना और बोलना।