
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। बुधनी, छतरपुर और दमोह मेडिकल कालेजों में इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रारंभ नहीं हो पाएगा। इसका मुख्य कारण यह है कि इनके सहित नौ कालेजों को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) पर देने के विचार के चलते फैकल्टी भर्ती की प्रक्रिया बीच में निरस्त कर दी गई है।
अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शासकीय मेडिकल कालेज को पीपीपी मोड पर नहीं दिया जाएगा। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया फिर से भले ही शुरू हो जाएगी, लेकिन इस सत्र में मान्यता नहीं मिल पाएगी।
कारण, प्रवेश के लिए तीसरे चरण की काउंसलिंग शुरू होने वाली है। अब न इतनी जल्दी फैकल्टी की उपलब्धता हो सकती है और न ही नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) निरीक्षण कर सकता है।
सतना, सिवनी, नीमच, मंदसौर, सिंगरौली, श्योपुर और इन तीनों कालेजों को मिलाकर 342 पदों पर फैकल्टी की भर्ती प्रक्रिया एक जून से प्रारंभ की गई थी, जिसे 15 सितंबर को निरस्त कर दिया गया था। भर्ती रद करने का कारण यह रहा है कि जब सरकार इन कालेजों को पीपीपी मोड पर देने जा रही हो, तो भी शासन की तरफ से फैकल्टी की नियुक्ति क्यों की जाए।
पीपीपी मोड पर देने के विचार के चलते भर्ती ही नहीं अन्य संसाधन जुटाने में भी देरी हुई। अब अगले सत्र से ही इन कालेजों को मान्यता मिलने की संभावना है। राजगढ़, मंडला और उज्जैन मेडिकल कालेज भी अगले वर्ष से ही शुरू हो सकते हैं। यह तीन कालेज खुलते तो सौ-सौ सीटों के मान से एमबीबीएस की 300 सीटें बढ़ जातीं। अभी प्रदेश के 20 शासकीय मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की 3020 सीटें हैं।
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