
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा ली जा रही 25 हजार रुपये लेट फीस को मप्र हाई कोर्ट ने सही ठहराया है। परीक्षा आवेदन में ली जाने वाली इस लेट फीस को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी। यह याचिका मोहम्मद रिजवान ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि 10 मार्च 2026 को सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पद के लिए विज्ञापन जारी हुआ था।
इसमें फार्म भरने की अंतिम तिथि आठ मई और शुल्क 500 रुपये तय था। नौ से 15 मई तक लेट फीस तीन हजार रुपये रखी गई और 16 मई से 23 सितंबर तक इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इतनी अधिक लेट फीस आर्थिक आधार पर भेदभाव करती है। अत्यधिक शुल्क की वजह से वह फार्म नहीं भर पा रहा है।
याचिका के साथ राजस्थान, केरल और उप्र सहित अन्य आयोगों द्वारा ली जाने वाली अधिकतम फीस के नोटिफिकेशन भी प्रस्तुत किए गए। पीएससी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने याचिका निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आयोग ने जानबूझकर तीन हजार और 25 हजार रुपये की लेट फीस का प्रविधान किया है, ताकि उम्मीदवार देर से आवेदन जमा करने से बचें।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई उचित आधार नहीं मिला। तय समय में आवेदन फार्म नहीं भरने का कोई ठोस कारण भी नहीं बताया गया। इसलिए बिना किसी ठोस आधार वाली इस याचिका को निरस्त किया जाता है।
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