
Naidunia Ground Report : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर की सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढों में लोगों की जान जा रही और नगर निगम के अफसर आंख मूंदे बैठे हैं। निगम के जोनल अधिकारी व इंजीनियर अपने क्षेत्र की सड़कों में खुली आंखों से दिखने वाले इन गड्ढों के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। अफसरों की इसी लापरवाही की कीमत इंदौर की जनता को जान देकर चुकानी पड़ रही है। शुक्रवार रात बापट चौराहे के पुल पर बने गड्ढे के कारण दोपहिया वाहन पर बैठी राधाबाई ठाकुर की गिरने से जान चली गई। इस घटना के बाद भी नगर निगम के अफसरों ने इन गड्ढों को दुरुस्त करने की सुध नहीं ली। जहां हादसा हुआ वहां से कुछ ही दूरी पर निगम का सुखलिया जोन है। यहां के अफसरों ने शनिवार को यह जानने की कोशिश भी नहीं की कि आखिर हादसा हुआ कहां है।
गड्ढा देख बोले- पिछली ठंड में ही करवाया था पेचवर्क
नईदुनिया ने इस जोन के सब इंजीनियर विनोद वर्मा को पुल पर ले जाकर हादसे वाली जगह पर गड्ढा दिखाया तो वे कहने लगे यहां पर पुल का एक हिस्सा जोन पांच तो दूसरा जोन सात में आता है। ठंड के दौरान पुल पर जहां गड्ढा हुआ है उस हिस्से पर पेचवर्क करवाया था। वर्षा के कारण पुल पर फिर गड्ढा हो गया है। इसे हम जल्द दुरुस्त करवाएंगे।
सर्विस रोड किनारे चैंबर का खुला ढक्कन दुर्घटना को दे रहा दावत

बापट चौराहे पर जिस जगह पुल पर दुर्घटना हुई उससे कुछ ही दूरी पर विजय नगर की ओर सर्विस रोड पर ड्रेनेज का एक चैंबर है। उसका ढक्कन खुला हुआ था, जिसके कारण वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। निगम के अफसर यहां स्टार्म वाटर लाइन डालने का कार्य तो कर रहे हैं लेकिन खुले चैंबर को सुरक्षित करने का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कई सड़कों पर दुर्घटना को दावत दे रहे गड्ढे
विजय नगर चौराहे से रेडिसन की ओर जाने वाले हिस्से में सड़क पर गड्ढा है। वर्षा में उसमें पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को नहीं दिखता है। ऐसे में यह दुर्घटना का कारण बना हुआ है। इसी तरह बंगाली चौराहे से पीपल्याहाना चौराहे की ओर जाने वाली सर्विस रोड पर भी कई गड्ढे हो गए हैं। यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को ये गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटना हो जाती है। निगम द्वारा सड़कों पर अक्सर गड्ढों को भरने व पेचवर्क के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। यही वजह है कि थोड़ी सी वर्षा के बाद ही सड़कों पर गड्ढे हो जाते हैं। वर्षा के दौरान सड़कों पर डामर का पेचवर्क करना संभव भी नहीं होता है। ऐसे में कई बार मुरम व गिट्टी डालकर अस्थायी तौर पर गड्ढों का भराव किया जाता है। नगर निगम द्वारा प्रतिवर्ष शहर की डामर की सड़कों पर पेचवर्क व मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी हालात यह है कि सड़कों पर गड्ढे होने पर भी निगम के अफसर सुधार कार्य जल्द नहीं करवाते हैं।