
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी (Nana Patwari) को पुलिस ने ड्रग्स के एक केस में हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। इस मामले में शुक्रवार सुबह जीतू पटवारी अपने भाई नाना पटवारी के साथ मीडिया के सामने आए। नाना ने कहा कि ड्रग्स केस में जो लोग पकड़े गए है वो हमारी विधानसभा के हैं।
मैं उन्हें नहीं पहचानता हूं। यह केस पूरी तरह से बनाया गया है क्योंकि मैं जीतू पटवारी का भाई हूं। मीडिया के सवालों पर नाना ने यह बात भी स्वीकारी कि वो तीन-चार साल पहले ड्रग्स लेते थे और यह उनकी गलती थी। रिहैब सेंटर में इलाज के बाद अब वे किसी तरह का नशा नहीं करते हैं।
नाना पटवारी ने कहा कि जिन लोगों को पुलिस ने ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया है, उनसे उनका किसी भी प्रकार का ड्रग्स संबंधी लेन-देन या बातचीत नहीं है। गुरुवार सुबह वे अपनी गाड़ी सर्विसिंग के लिए लेकर गए थे, तभी पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। थाने में उनसे केवल नाम पूछा गया और हिरासत में लेने का कोई कारण नहीं बताया। दिनभर शहर में पुलिस उन्हें लेकर घूमती रही और रात में उन्हें यह बताया गया कि ड्रग्स केस में उन्हें हिरासत में लिया गया है। इसके बाद रात में उन्हें छोड़ दिया गया।
नाना पटवारी ने मीडिया के सवालों पर बताया कि वे अपनी गाड़ी संजय कौशल उर्फ रॉनी के कार वॉश सेंटर पर धुलवाते हैं। पुलिस ने संजय और एक और व्यक्ति इरफान को लेकर पूछा। उन्होंने यह भी बताया कि संजय और इरफान कांग्रेस कार्यकर्ता है और चुनाव के समय उन्होंने पार्टी के लिए काम किया था। नाना पटवारी ने यह भी साफ किया की जिस कार के बारे में बात की जा रही है वो संजय की है और उसमें जो भी कुछ सामान मिला है उनका उससे कोई भी संबंध नहीं है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने मीडिया के सामने आकर सवालों के जवाब दिए और कहा कि उनके भाई को इस तरह हिरासत में लेकर परेशान करना राजनीतिक प्रतिशोध है। उन्होंने कहा कि नाना पटवारी किसी भी तरह की ड्रग्स तस्करी में शामिल नहीं है। इसके बाद भी उसे जबरन हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भाई ने पहले किए जाने वाले नशे को स्वीकार किया है, लेकिन अब उसका इससे कोई लेना देना नहीं है।
नाना उर्फ कुलभूषण पटवारी के खिलाफ इंदौर के राजेंद्र नगर और भंवरकुआं थानों में कुल नौ आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पहला प्रकरण वर्ष 2012 में राजेंद्र नगर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 341 और 147 के तहत दर्ज किया गया था। वर्ष 2015 में इसी थाने में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एक प्रकरण दर्ज हुआ।
इसके बाद वर्ष 2017 में विभिन्न धाराओं के तहत चार प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें धारा 147 और 148 (दंगा) से लेकर हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित मामले भी शामिल हैं। वर्ष 2023 में राजेंद्र नगर थाने में एक और प्रकरण दर्ज हुआ। इसी वर्ष भंवरकुआं थाने में भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एक प्रकरण दर्ज किया गया।