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इंदौर में जमीन के अंदर पहली बार दौड़ी ‘नर्मदा’, शुरू हुई भूमिगत मेट्रो की खोदाई, 20 मीटर गहराई तक जाएगी टीबीएम, ट्रॉली से बाहर आएगी मिट्टी

इंदौर ने मंगलवार को भूमिगत मेट्रो की तरफ कदम बढ़े और पहली बार जमीन के नीचे टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) चली। एयरपोर्ट स्टेशन से टीबीएम नर्मदा ने टनल की खो...और पढ़ें

By prem jatEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 10:26:12 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 10:26:12 PM (IST)
इंदौर में जमीन के अंदर पहली बार दौड़ी ‘नर्मदा’, शुरू हुई भूमिगत मेट्रो की खोदाई, 20 मीटर गहराई तक जाएगी टीबीएम, ट्रॉली से बाहर आएगी मिट्टी
लोकोमोटिव इंजन जो मिट्टी बाहर निकालेगा। -नईदुनिया

HighLights

  1. हर 1.4 मीटर खोदाई से निकलेगी 48.6 घनमीटर मिट्टी
  2. एयरपोर्ट स्टेशन से टीबीएम नर्मदा ने टनल की खोदाई शुरू की
  3. खोदाई में निकल रही मिट्टी को बाहर निकालने की व्यवस्था भी की गई है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर ने मंगलवार को भूमिगत मेट्रो की तरफ कदम बढ़े और पहली बार जमीन के नीचे टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) चली। एयरपोर्ट स्टेशन से टीबीएम नर्मदा ने टनल की खोदाई शुरू की। करीब 102 मीटर लंबी और 6.65 मीटर व्यास के कटिंग व्हील वाली यह मशीन करीब 20 मीटर गहराई तक जाकर भूमिगत टनल तैयार करेगी। खोदाई में निकल रही मिट्टी को बाहर निकालने की व्यवस्था भी की गई है।

दरसअल इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और हाइड्रोलिक सिस्टम की जांच पूरी करने के बाद शाम करीब सात बजे टीबीएम को चालू किया गया। शुरुआती चरण में मशीन से निकलने वाली मिट्टी कन्वेयर के माध्यम से बाहर आएगी। टीबीएम के 20 मीटर अंदर जाने के बाद लोकोमोटिव इंजन को टनल में उतारा जाएगा। इसके पीछे तीन ट्रालियां रहेंगी, जिनमें खोदाई से निकली मिट्टी भरकर बाहर लाई जाएगी। करीब दो से तीन दिन बाद लोकोमोटिव का उपयोग शुरू होने की संभावना है।


हर 1.4 मीटर खुदाई में निकलेगी 48.6 घनमीटर मिट्टी

टीबीएम जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, प्रत्येक करीब 1.4 मीटर खुदाई के बाद लगभग 48.6 घनमीटर मिट्टी निकलेगी। इसे ट्रॉलियों के जरिए बाहर लाया जाएगा। करीब पांच से सात दिन बाद टीबीएम के पीछे अस्थायी पटरियां बिछाने का काम शुरू होगा। इन्हीं पटरियों पर लोकोमोटिव इंजन और ट्रालियां आगे बढ़ते हुए मिट्टी बाहर निकालेंगी।

ऊपर रखा हाइड्रोलिक प्रेसर, गहराई बढ़ने पर नीचे जाएगा

टीबीएम को आगे बढ़ाने और घुमाने में अहम भूमिका निभाने वाली हाइड्रोलिक प्रेसर मशीन को फिलहाल जमीन के ऊपर रखा गया है। जैसे-जैसे टीबीएम जमीन के भीतर गहराई में जाएगी, हाइड्रोलिक सिस्टम को भी नीचे उतारा जाएगा। मशीन के आगे बढ़ने के साथ प्री-कास्ट कंक्रीट रिंग्स लगाकर टनल की संरचना तैयार की जाएगी।

ईपीबी तकनीक से सुरक्षित खोदाई

नर्मदा अर्थ प्रेशर बैलेंस शील्ड (इपीबी) मिक्स शील्ड तकनीक पर आधारित है। इसमें गैस मानिटरिंग सिस्टम, वन-सेकंड इमरजेंसी स्टाप और 24x7 कंट्रोल रूम मानिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं हैं। मशीन ने 25 अप्रैल को थाईलैंड में फैक्ट्री एसेप्टेंस टेस्ट पूरा किया है। इसके बाद इसे इंदौर लाकर असेंबल किया गया और एयरपोर्ट स्टेशन से लान्च किया गया।

इमारतों और जमीन की हर हलचल पर नजर

भूमिगत खोदाई के दौरान आसपास के मकानों और जमीन की सुरक्षा के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन स्कीम लागू की गई है। सेंसर जमीन और भवनों में होने वाले मामूली बदलावों को भी रिकॉर्ड करेंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। मेंट्रो के प्रबंध संचालक एस कृष्ण चैतन्य ने अधिकारियों और तकनीकी टीम को सुरक्षा, गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

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