
इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भारत में बनने वाली हर दवा जेनरिक ही है। डॉक्टरों के बजाय दवा निर्माता कंपनियों पर सख्ती हो कि वे एक ही क्वालिटी की दवाई अलग-अलग नाम से न बेचें। दवाइयां कोई होटल में मिलने वाली डिश नहीं है कि कम-ज्यादा मसाले गिनाकर मरीजों से मनमानी कीमत वसूल सकें।
डॉक्टरों द्वारा मरीजों को जेनरिक या ब्रांडेड दवाइयां लिखने पर उपजे विवाद पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ.केके अग्रवाल ने यह बात कहते हुए दवाई कंपनियों को कटघरे में खड़ा किया। वे रविवार को आईएमए (इंदौर शाखा) के डॉ. हार्डिया ओरिएशन में शामिल होने आए थे। उन्होंने बताया जेनरिक, जेनरिक ट्रेड और जेनरिक ब्रांडेड तीनों प्रकार की दवा एक ही कंपनी बनाकर अलग-अलग नाम से मार्केट में सप्लाय करती है।
इससे जेनरिक व ब्रांड के बीच संशय पैदा हो रहा है। कंपनियां सभी दवा एक नाम से बेचे तो परेशानी खत्म हो जाएगी। उन्होंने डॉक्टरों को स्पष्ट, कैपिटल लेटर में दवाइयों का नाम लिखने के लिए कहा। साथ ही कहा मरीज की स्थिति के मुताबिक ब्रांड लिखना डॉक्टर का अधिकार है, धोखा देना कभी नहीं।
मंत्री तीन महीने में एमबीबीएस बने डॉक्टर से इलाज करवाएंगे?
क्रॉस पैथी पर चल रहे विवाद पर डॉ. अग्रवाल ने कहा कोई मंत्री या अफसर तीन महीने में एमबीबीएस बने डॉक्टर से इलाज करवाएंगे? कभी नहीं, वे सबसे ज्यादा योग्य और डिग्री वाले डॉक्टर को तलाशते हैं। होम्योपैथी, आयुर्वेदिक और यूनानी सभी अपनी अपनी पैथी में इलाज करें। गांव में इलाज के लिए ऐसी तरकीब निकालने के बजाय डॉक्टरों की संख्या बढ़ाएं। किसी अस्पताल में गैर एमबीबीएस को नौकरी पर रखा गया और उसके इलाज करने के दौरान मरीज की मौत हो गई तो अस्पताल बंद हो जाएगा।
स्टंट वापस लिए तो कानूनी कार्रवाई
देशभर में दिल के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले स्टंट की कीमत घटाने के बाद से बाजार से स्टंट गायब होने का मुद्दा उठ रहा है। कंपनियां ज्यादा कीमत वाले स्टंट मार्केट से वापस लेकर विदेश में सप्लाय कर रही हैं। इस मुद्दे पर आईएमए अध्यक्ष ने कहा स्टंट वापस लिए तो कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई होगी। मरीजों को बाजार में सस्ती दर में स्टंट नहीं मिल रहा है तो वे शिकायत करें।
90 फीसदी मरीज बिना जांच हो सकते हैं ठीक
उन्होंने कहा 90 प्रतिशत मरीज बिना जांच के ठीक हो सकते हैं। मरीज को विशेष परिस्थिति को छोड़कर कम से कम 3-4 दिन तक किसी जांच की जरूरत नहीं पड़ती। मरीज के कहने पर ही डॉक्टर को जांचें कराना चाहिए। इसके लिए मरीज को जागरूक होना जरूरी है।
ओलिंपियाड के पुरस्कार वितरित
कार्यक्रम में हाल ही में आईएमए द्वारा आयोजित ओलिंपियाड के पुरस्कार भी दिए गए। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र एरन, डॉ. दिलीप आचार्य विशेष रूप से उपस्थित थे। संचालन डॉ. संजय लोंढ़े ने किया व आभार डॉ. सुमित शुक्ला ने माना।