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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 16, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Niraladham Indore: इंदौर के निरालाधाम के कण-कण से आती है राम नाम की सुगंध

Niraladham Indore: रामायण के हर चरित्र के होते हैं दर्शन, राम नाम का ही लगता है भोग।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Tue, 16 Jan 2024 08:36:19 AM (IST)Updated Date: Tue, 16 Jan 2024 11:21:23 AM (IST)
Niraladham Indore: इंदौर के निरालाधाम के कण-कण से आती है राम नाम की सुगंध
इंदौर के निरालाधाम के कण-कण से आती है राम नाम की सुगंध

HighLights

  1. अहिल्या नगरी में भगवान राम की महिमा का गुणगान करता अनूठा निरालाधाम है।
  2. 1 हजार वर्गफीट के परिसर में तीन दर्जन से अधिक मंदिर हैं, जिनकी नींव और दीवारों में भक्तों द्वारा लिखे गए अनगिनत राम नाम पत्रक डाले गए हैं।
  3. हर मंदिर के गुंबद, दीवार और कोने-कोने में लाल रंग से जय श्रीराम लिखा गया है।

Niraladham Indore: रामकृष्ण मुले, इंदौर। अहिल्या नगरी में भगवान राम की महिमा का गुणगान करता अनूठा निरालाधाम है। इस मंदिर का कण-कण राम नाम से महकता है। 11 हजार वर्गफीट के परिसर में तीन दर्जन से अधिक मंदिर हैं, जिनकी नींव और दीवारों में भक्तों द्वारा लिखे गए अनगिनत राम नाम पत्रक डाले गए हैं। हर मंदिर के गुंबद, दीवार और कोने-कोने में लाल रंग से जय श्रीराम लिखा गया है।

कनाडिया रोड स्थित निरालाधाम में आकर रामायण के हर चरित्र से परिचय होता है। मंदिर में प्रवेश के लिए न प्रसाद लगता है, न चढ़ावा। एकमात्र शर्त निभानी पड़ती है, वह है 108 बार जयश्रीराम लिखना। इसके लिए पत्रक, पेन और स्लेट भक्तों को उपलब्ध कराई जाती है। संचालक प्रकाशचंद वागरेचा बताते हैं कि 1990 से मंदिर का निर्माण शुरू हुआ जो आज भी जारी है। यहां आए लाखों भक्तों ने करोड़ों बार राम नाम लिखा है। इन पत्रकों को मंदिर की नींव, दीवार, मूर्तियों के भीतर रखा गया है।


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चलती है ईश्वरीय सत्ता, संरक्षक की भूमिका में कौशल्या नंदन

अन्य मंदिरों की तरह यहां भी सात पदाधिकारी और 11 सदस्यीय कार्यकारिणी समिति है, लेकिन कोई मनुष्य नहीं है। हर जिम्मेदारी किसी न किसी देवी-देवता के पास है। अध्यक्ष की जिम्मेदारी अंजनी पुत्र हनुमान और संरक्षक की भूमिका कौशल्या नंदन भगवान श्रीराम संभालते हैं। सचिव भोलेनाथ, कोषाध्यक्ष कुबेर, सुरक्षा अधिकारी यमराज, लेखा-जोखा अधिकारी चित्रगुप्त, वास्तुविद् भगवान विश्वकर्मा हैं। कार्यकारिणी सदस्य भगवान दत्तात्रेय, लक्ष्मीनारायण, भरत, शत्रुघ्न, पार्वती, माता काली, लक्ष्मण, पार्श्वनाथ, मां दुर्गा, मां अन्नपूर्णा, भगवान सत्यनारायण हैं। यहां निरालाधाम में ईश्वरीय सत्ता चलती है। मंदिर में एक भी दानपेटी नहीं है और न ही अगरबत्ती लगाई जाती है।

200 फीट की ऊंचाई पर 51 फीट के बजरंगबली

रामराज्य अभिषेक के दृश्य को दर्शाते राम मंदिर के साथ 200 फीट की ऊंचाई पर 51 फीट के बजरंगबली भी हैं। रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद, विभीषण, कैकेयी, मंथरा, शूर्पणखा की भी मूर्तियां हैं। भगवान शिव और गणेश की मूर्तियां भी विराजित हैं। यहां सबकी पूजा होती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक रामायण का प्रत्येक पात्र पूजनीय है। मंदिर की बाहरी दीवार पर रामजन्म से वनवास तक की कथा चित्रित की गई है।

छाया रामलला की प्रतिष्ठा का उल्लास

यहां 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाली रामलला की प्रतिष्ठा का उल्लास छाया है। इस उल्लास की अभिव्यक्ति भक्त हर दिन मेरी झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे, राम आएंगे भजन गाकर कर रहे हैं। प्रतिष्ठा के दिन यहां दीपोत्सव मनाया जाएगा। भजन-कीर्तन और महाआरती होगी।