
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि, 11 अगस्त को हुई सुनवाई में हमने कोर्ट को बताया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की लापरवाही के कारण यहां पर हादसा हो सकता है। कोर्ट ने प्राधिकरण के अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देश पर भी सुधार नहीं हुआ और अब फिर हादसे में एक महिला की मौत हो गई।
हाईकोर्ट में बायपास की बदहाली को लेकर मातृ फाउंडेशन की ओर से जनहित याचिका अभिभाषक अमय बजाज ने 2021 में दायर की थी। याचिका में बायपास पर मौजूद बड़े-बड़े गड्ढ़े, टूटी सर्विस रोड, खुले ड्रेनेज, जलभराव, खराब स्ट्रीट लाइट, दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पाट, अव्यवस्थित ट्रैफिक के साथ गलत डिजाइन को सुधारने के बिंदु शामिल है।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए भी निवेदन किया गया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में एनएचएआई की ओर से पेश हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि, जवाब फाइल कर दिया गया है। कहा कि सीनियर एडवोकेट दिल्ली से पेश होने हैं, आज वो पेश नहीं हो पाएंगे, ऐसे में उन्हें समय दिया जाए।
कोर्ट ने एनएचएआई के वकीलों को ताकीद कर दिया कि शुक्रवार को वे कोर्ट के समक्ष पेश हों। यह बताए कि एनएचएआई ने 2023 में हाईकोर्ट द्वारा जारी अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी गाइडलाइन के बाद क्या काम किया गया है। हाईकोर्ट 16 अक्टूबर को भी इस मामले की सुनवाई करेगा।
इंदौर-देवास बायपास पर जानलेवा गड्ढों और उनके कारण हो रही लगातार मौतों के मामले में हाई कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रति कड़ा ऐतराज और नाराजगी जताई है। पिछले दिनों बायपास पर गड्ढे में गिरने के कारण एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई थी।
बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को इस घटना की जानकारी दी। इस पर हाई कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि बायपास की हालत बेहद खराब है और यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। मामले की अगली सुनवाई दो दिन बाद दोबारा की जाएगी।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अमय बजाज ने कोर्ट को पूरे बायपास पर बने बड़े-बड़े गड्ढों की तस्वीरें प्रस्तुत कीं। कोर्ट को अवगत कराया गया कि बायपास पर वाहन चालकों से भारी टोल टैक्स वसूला जा रहा है, परंतु सड़क का उचित रख-रखाव बिल्कुल नहीं हो रहा है। कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे रात के समय दोपहिया वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
गड्ढों के कारण कार, ट्रक और भारी वाहन भी अनियंत्रित होकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। एनएचएआई पर आदेशों का असर नहींहाई कोर्ट की डिविजन बेंच इससे पहले भी चार से पांच बार एनएचएआई को बायपास की स्थिति सुधारने के सख्त निर्देश दे चुकी है। बायपास के कई अंडरपास ऐसे हैं जहां गहरे गड्ढे हो चुके हैं।
पूर्व में तत्कालीन चीफ जस्टिस सुरेश कैत, संजीव सचदेवा, तत्कालीन प्रशासनिक जज विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस विवेक रूसिया तक एनएचएआई को सुधार के कड़े निर्देश जारी कर चुके हैं, लेकिन बायपास की सूरत में अब तक कोई बदलाव नजर नहीं आया है।