इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2018-19 में प्रवेश को लेकर नई गाइड लाइन जारी की है, जिसमें स्नातक (अंडर ग्रेजुएशन) और स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) कोर्स के लिए आयु सीमा खत्म कर दी है। जानकारों के मुताबिक इसका कारण रजिस्ट्रेशन बढ़ाने और ओपन यूनिवर्सिटी के बजाय आवेदकों को पारंपरिक विश्वविद्यालयों की तरफ आकर्षित करना बताया जा रहा है। विभाग ने इस साल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में भी बदलाव किया है।
यूजी कोर्स में अधिकतम 24 और पीजी में 27 वर्ष आयु सीमा रखी गई थी, जिसे विभाग ने पूरी तरह हटा दिया है। यानी अब यूजी और पीजी में कोई भी व्यक्ति दाखिला लेकर नियमित कोर्स की पढ़ाई कर सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो सरकार पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जिससे ग्रोस एनरोलमेंट रेशो बढ़ेगा। वे आवेदक जिनकी आयु अधिक होने से विवि और कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाते थे और पढ़ाई जारी रखने के लिए ओपन यूनिवर्सिटी का रुख करते थे, उनके रेशो को भी कम करने पर विचार किया जा रहा है।
ये लोग पारंपरिक विवि में आसानी से दाखिला ले सकेंगे। इसके अलावा शासन ने उन्हें भी सुविधा दी है, जो परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह सुविधा सिर्फ पारंपगत कोर्स में ही मिलेगी। मेडिकल और लॉ जैसे कोर्स पर अभी इसे लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि इन कोर्स की मॉनिटरिंग मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास है। यह आयु सीमा बीए, बीकॉम, बीएससी, एमकॉम, एमएससी, एमए कोर्स पर लागू होगी।
ट्रांसजेंडर के लिए को-एड कॉलेज
ट्रांसजेंडर के लिए भी नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। विभाग ने इन्हें सिर्फ को-एड कॉलेजों में प्रवेश देने का नियम बनाया है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में बॉयज-गर्ल्स कॉलेज चयन करने की इन्हें पात्रता नहीं होगी। मामले में कॉलेजों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
छात्राओं को मिली सौगात
छात्राओं को प्रवेश के लिए लगने वाली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फीस से छूट दी गई है, जबकि छात्रों को पहले चरण में 100, दूसरे चरण में 250 और तीसरे चरण व सीएलसी के लिए 500 रुपए देना होगी। छात्राओं को रजिस्ट्रेशन की फीस जमा नहीं करनी होगी।
ऑफलाइन भी हो प्रवेश
आयु सीमा हटाकर विभाग ने कई लोगों के लिए पढ़ाई का रास्ता खोल दिया है। मगर ऑनलाइन के अलावा कॉलेजों में ऑफलाइन से भी दाखिला होना चाहिए। तभी रजिस्ट्रेशन के आंकड़े में वृद्धि होगी। कॉलेजों की खाली सीटों को भी भरने में भी आसानी होगी। कॉलेजों की फीस भी एक समान होने की जरूरत है। -डॉ. मंगल मिश्र, शिक्षाविद