
इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। गर्मी के मौसम में सूरज के तेवर भी तीखे हो गए हैं। ऐसे में इस मौसम में पंचकर्म, शिरोधारा, मडपैक, मड बाथ, कलर थैरेपी जैसी पद्धतियों को खासी तवज्जो मिल रही है। गर्मी में लोग खुद को ठंडा रखने के लिए अब प्राकृतिक तरीकों को अपना रहे हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद तो ली ही जा रही है, साथ ही घर में भी कईतरीके अपनाए जा रहे हैं। लू से बचने और लू लग जाने के बाद उसके उपचार के लिए जहां कलर थैरेपी को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, वहीं एसिडिटी, अपच और पसीने की बदबू से निजात पाने के लिए मड थैरेपी अपनाई जा रही है।
शहर के युवा जिन्हें धूप में ज्यादा रहना पड़ता है, वे केमिकल या एलोपैथी के बजाय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल हैं। सनबर्न, सन स्ट्रोक, फंगल इन्फेक्शन को दूर करने और बेजान हो चुकी त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए भी ये तरीके अपनाए जा रहे हैं।
कलर थैरेपी के साथ मड थैरेपी का भी इस्तेमाल
प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. एके जैन बताते हैं कि कम वक्त में बेहतर उपचार के लिए कलर थैरेपी अपनाई जा रही है। इसमें रंगों का इस्तेमाल करके उपचार किया जाता है। रंग प्रकृति से मिलते हैं और ये रंग हमारे शरीर की ऊर्जा को संतुलित करते हैं। यह थैरेपी एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर रंग लगाकर की जाती है। इस मौसम में चंदन, केसर, नीला और हरा रंग अपनाना चाहिए। इससे शरीर को ठंडक मिलती है। ये रंग कपड़ों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। गर्मी में पेट संबंधी समस्या जैसे एसीडिटी, पेट का भारीपन, पीलिया, हेपेटाइटिस आदि के उपचार के रूप में मिट्टी का इस्तेमाल हो रहा है।
हर 15 दिन में कराएं पंचकर्म
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रामप्रकाश गुर्जर बताते हैं कि इस मौसम में बड़ी संख्या में लोग मसाज, पंचकर्म, शिरोधारा कराते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने पर बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपचार के ये तरीके अपनाए जाते हैं। अन्य मौसम की अपेक्षा इस मौसम में पंचकर्म और शिरोधारा जल्दी-जल्दी किया जाता है। हर 15 दिन में ये तरीके अपनाने से इस मौसम में भी सेहतमंद रहा जा सकता है।
इस तरह करें मिट्टी तैयार
प्राकृतिक चिकित्सक वृंदा खांडवे बताती हैं कि मड थैरेपी के जरिए कई रोगों से बचा जा सकता है। मड थैरेपी के लिए नदी, तालाब की मिट्टी बेहतर होती है। मुलतानी मिट्टी भी उपयोग में लाई जा सकती है। नदी-तालाब की मिट्टी नहीं मिलने पर 4-5 फीट गहरे गड्ढे की मिट्टी लें जो केमिकल रहित हो। इस मिट्टी को दो दिन धूप में सुखाएं। इससे मिट्टी के हानिकारक तत्व खत्म हो जाएंगे। सूखी मिट्टी को फिर कूट लें और छान लें। इसे मिट्टी के बर्तन में 12 से 15 घंटे के लिए गलाकर रख दें। इस मिट्टी का इस्तेमाल मड थैरेपी या मड फेस पैक के रूप में करें। एक बाउल मिट्टी में एक टी स्पून तुलसी, गुलाब, गुलाब जल, चंदन पाउडर, नीम पाउडर, एलोविरा पल्प या हल्दी मिला सकते हैं।
ऐसे करें प्राकृतिक
* यदि सन स्ट्रोक हो गया हो तो हाथ के अंगूठों के ऊपरी पोर को नील वाले पानी में डालकर थोड़ी देर रखें।
* पेट संबंधी समस्या से बचने के लिए सुबह खाली पेट पर मिट्टी या गीला तौलिया लपेटकर करीब 20 मिनट लेटे रहें।
* लू लगने पर ठंडे पानी की चादर से पूरे शरीर को ढंक दें।
* नारियल के तेल से पैर के तलवे व सिर में रात को मालिश करने से ठंडक मिलती है।
* फंगल इंफेक्शन के कारण होने वाली दाद, खुजली को दूर करने के लिए नारियल के तेल में कपूर मिलाकर लगाने से आराम मिलता है।
* सनबर्न होने पर मिट्टी में नीम और हल्दी पाउडर का इस्तेमाल करें।
* सनस्ट्रोक होने पर मिट्टी में नीम पाउडर का उपयोग करें।
* मिट्टी का गोला बनाकर उसे बेहद महीन कपड़े में रखकर नाभि पर रखें। यह गोला इतना बड़ा हो कि नाभि के चारों ओर कम से कम एक-एक इंच का हिस्सा उससे ढंका हो।
* झाई आने पर मिट्टी में तुलसी का पाउडर मिलाकर उपयोग करें।
* पसीने की बदबू से निजात पाने के लिए मिट्टी में चंदन और गुलाब पाउडर मिलाकर शरीर पर करीब 1 घंटे के लिए लगाएं और फिर नहा लें। इसके नियमित करने से पसीने की बदबू नहीं आएगी।