• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

तीर्थों को सिर्फ भीड़ प्रबंधन नहीं, व्यवहार प्रबंधन भी चाहिए, श्रीमहाकालेश्वर और ओंकारेश्वर के हालिया विवादों से उठे सवाल

ज्योतिर्लिंग श्रीमहाकालेश्वर मंदिर उज्जैन व ओंकारेश्वर में हुई हालिया विवाद की घटनाओं ने बड़े तीर्थ स्थलों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तीर्थों में सिर्फ भीड़ प्रबंधन नहीं, व्यवहार प्रबंधन भी जरूरी हो गया है। दर्शनार्थी का संपर्क मंदिर में पहुंचने से पहले और दर्शन के बाद भी अनेक लोगों से होता है।

By Arvind dubeyEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 03 Sep 2026 07:12:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 07:12:33 PM (IST)
  • को पसंदीदा स्रोत बनाएं preferred source google
तीर्थों को सिर्फ भीड़ प्रबंधन नहीं, व्यवहार प्रबंधन भी चाहिए,  श्रीमहाकालेश्वर और ओंकारेश्वर के हालिया विवादों से उठे सवाल
भगवान महाकाल का शृंगार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. विवाद की घटनाओं ने बड़े तीर्थ स्थलों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं
  2. तीर्थों में सिर्फ भीड़ प्रबंधन नहीं, व्यवहार प्रबंधन भी जरूरी हो गया है
  3. दर्शनार्थी का संपर्क मंदिर में पहुंचने से पहले और दर्शन के बाद भी अनेक लोगों से होता है

अरविंद दुबे, नईदुनिया, इंदौर : ज्योतिर्लिंग श्रीमहाकालेश्वर मंदिर उज्जैन व ओंकारेश्वर में हुई हालिया विवाद की घटनाओं ने बड़े तीर्थ स्थलों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तीर्थों में सिर्फ भीड़ प्रबंधन नहीं, व्यवहार प्रबंधन भी जरूरी हो गया है।

दर्शनार्थी का संपर्क मंदिर में पहुंचने से पहले और दर्शन के बाद भी अनेक लोगों से होता है। फूल-प्रसाद विक्रेता, पार्किंग कर्मचारी, वाहन चालक, होटल-भोजनालय कर्मी और स्थानीय दुकानदार भी उनके तीर्थ अनुभव का हिस्सा होते हैं। ऐसे में विवाद या अनुचित वसूली की शिकायत केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, तीर्थ प्रबंधन की व्यापक कमी भी है।


उज्जैन का श्रीमहाकाल क्षेत्र इसका हालिया उदाहरण है। यहां बीते ढाई वर्षों में प्रसाद खरीदने के दबाव, पार्किंग, प्रवेश और दर्शन व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं तथा सेवा व्यवस्था से जुड़े लोगों के बीच विवाद सामने आए हैं। ओंकारेश्वर में भी शीघ्र और वीआइपी दर्शन के नाम पर अधिक राशि वसूली तथा फर्जी टिकट-रिस्ट बैंड जैसे मामले सामने आ चुके हैं। दोनों तीर्थों की घटनाएं अलग हैं, लेकिन सवाल एक है -श्रद्धालु से सीधे संपर्क रखने वाले हर वर्ग के लिए सेवा और व्यवहार के मानक कैसे तय हों?

अंबाजी और केंद्र की पहल से मिल सकता है मॉडल

गुजरात के अंबाजी में मंदिर से जुड़े ट्रस्ट सदस्यों, पुजारियों, भोजनालय कर्मचारियों व सुरक्षाकर्मियों को चार दिन का सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण दिया गया। इसमें संवाद, सेवा शिष्टाचार और आगंतुकों से व्यवहार जैसे विषय शामिल थे। केंद्र सरकार की पर्यटन मित्र-पर्यटन दीदी पहल भी इसी व्यापक सोच पर आधारित है। इसमें ऑटो-टैक्सी चालक, पुलिसकर्मी, दुकानदार, होटल-रेस्तरां कर्मचारी और स्ट्रीट वेंडर सहित पर्यटकों से सीधे संपर्क रखने वाले लोगों को आतिथ्य, स्वच्छता, सुरक्षा और बेहतर व्यवहार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 2025 में संसद को दी जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में इस पहल के तहत 1,487 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया।

अच्छा व्यवहार भी जरूरी

ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों को सुलभ और सुचारू दर्शन के साथ अच्छा व्यवहार मिले, इसके लिए व्यवस्थाओं को पुख्ता किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को ठगी से बचाने के लिए भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। - मुकेश काशिव, डिप्टी कलेक्टर एवं मंदिर दर्शन प्रभारी, ओंकारेश्वर

अच्छा व्यवहार सेवा के भाव से भी आता है

अच्छा व्यवहार केवल प्रशिक्षण से नहीं, सेवा के भाव से भी आता है। बाहर से आने वाला श्रद्धालु लंबी यात्रा के कारण परेशान हो सकता है। दुकानदार, वाहन चालक, होटल कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी का व्यवहार उसका पूरा तीर्थ अनुभव बदल सकता है। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर इसका अच्छा उदाहरण है, जहां सेवा भावना तीर्थ अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। - कैप्टन जैसन थामस, व्यवहार प्रबंधन विशेषज्ञ, इंदौर

श्रद्धालु आस्था और भावनाओं के साथ दर्शन के लिए पहुंचता है

मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु आस्था और भावनाओं के साथ दर्शन के लिए पहुंचता है। उसके मनोभावों को समझना और दर्शन में यथोचित सहयोग देना पुजारी, अधिकारी और कर्मचारियों सभी का दायित्व है। प्रयास यह होना चाहिए कि श्रद्धालु दर्शन के साथ अच्छा अनुभव और आत्मीय व्यवहार की स्मृतियां भी लेकर लौटे। - अशोक भट्ट, मुख्य पुजारी, खजराना गणेश मंदिर, इंदौर

यह भी पढ़ें- श्रावण के पहले सोमवार महाकाल मंदिर में बड़ा एक्शन, भस्म आरती व्यवस्था में मिलीं गंभीर खामियां, कलेक्टर ने हटाए कई कर्मचारी

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।