
इंदौर (नईदुनिया रिपोर्टर)। Pitru Paksha Shradh 2020 जिस तरह हम किसी के जन्मदिन या अवसर विशेष पर जब उससे मिलते हैं तो खाली हाथ नहीं जाते, उसी तरह श्राद्ध पक्ष में भी करते हैं। पूर्वजों को समर्पित इस 16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष में आप उन्हें बिना कुछ भेंट किए कैसे याद कर सकते हैं? श्राद्ध के बारे में यह जानकारी उज्जैन के रामानुज कोट के माधव प्रपन्नाचार्य ने माहेश्वरी महिला संगठन के उपहार क्रिएशन द्वारा आयोजित वेबिनार में कही। रविवार को आयोजित इस वेबिनार में श्रोताओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देते हुए स्वामी माधव प्रपन्नाचार्य ने कहा कि शास्त्र के अनुसार देव पूजा से भी श्रेष्ठ पितृ पूजा मानी गई है क्योंकि यह हमें पूर्वजों द्वारा दी गई शिक्षा, बेहतर जीवन और आशीष के प्रति कृतज्ञ भाव रखना सिखाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वज श्रद्धा के भूखे हैं सामग्री के नहीं, इसलिए इसे श्राद्ध पक्ष कहते हैं।
श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, अग्निकर्म और ब्राह्मण भोज का विधान है। यदि कोई सामर्थ्य या परिस्थिति नहीं है तो केवल ब्राह्मण भोज, यह भी नहीं तो ब्राह्मण को सीधा, यह भी नहीं तो गाय को चारा, यह भी संभव न हो तो दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके दोनों हाथ ऊंचे कर पूर्वजों का नाम लेकर याद करना भी पर्याप्त है। बात केवल इतनी है कि आप उन्हें कितना याद करते हैं?
स्वामी माधव प्रपन्नाचार्य ने कहा कि अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या पत्नी या बेटी-जमाई भी श्राद्ध कर सकते हैं तो इसका यही जवाब है कि यह किया जा सकता है। जब पत्नी पति के हर कर्म में उसकी सहभागी होती है तो फिर वह पति का श्राद्ध क्यों नहीं कर सकती? इसी तरह बेटी और जमाई भी श्राद्ध कर सकते हैं। ऐसा नहीं कि पूर्वजों को नमन करने के लिए केवल श्राद्ध पक्ष है। हम उन्हें हर दिन नमन कर सकते हैं, तर्पण कर सकते हैं। पूर्वजों को याद करने, उन्हें नमन करने के लिए कोई एक पक्ष या तिथि का बंधन नहीं है। कई बार यह देखा गया है कि भाई अलग-अलग रहते हैं और सभी की रसोई भी अलग है। ऐसे में अलग-अलग श्राद्ध भी किया जा सकता है। किसी कारण से यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध नहीं कर सकता तो नवरात्रि के बाद भी श्राद्ध किया जा सकता है।