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इंदौर के समीप चोरल के जंगल में अंजन-कल्लू व बीजा सहित विलुप्त प्रजातियों के पौधे बढ़ाएंगे हरियाली, हो रहा पौधारोपण

चोरल क्षेत्र में एक बार फिर सागौन के पौधों रोपने पर जोर दिया जा रहा है। लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा सागौन का होगा। वनमंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह का क...और पढ़ें

By Kapil NileyEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 10:25:00 AM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 10:25:00 AM (IST)
इंदौर के समीप चोरल के जंगल में अंजन-कल्लू व बीजा सहित विलुप्त प्रजातियों के पौधे बढ़ाएंगे हरियाली, हो रहा पौधारोपण
चोरल के जंगल में हो रहा पौधारोपण। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. पंद्रह हजार से ज्यादा सलाई गोंद की लगाएंगे कलम, चोरल में रोप रहे सागौन
  2. मानसून सक्रिय होते ही जंगलों को हरा-भरा बनाने करने की कवायद तेज हो गई है
  3. पौधों के संरक्षण से जंगलों की जैव विविधता मजबूत होगी और प्राकृतिक संतुलन भी बेहतर रहेगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मानसून सक्रिय होते ही जंगलों को हरा-भरा बनाने करने की कवायद तेज हो गई है। इंदौर वनमंडल के जंगलों में पौधे रोपे जा रहे है। सामान्य पौधों के साथ उन दुर्लभ और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक इन पौधों के संरक्षण से जंगलों की जैव विविधता मजबूत होगी और प्राकृतिक संतुलन भी बेहतर रहेगा।

जून अंतिम सप्ताह से जंगलों में सागौन, नीम, आवला सहित अंजन, कल्लू, बीजा, दहीमन, तिनसा और बेहड़ा जैसी दुर्लभ प्रजातियों के पौधे रोपे जा रहे है। इंदौर वनमंडल की चारों रेंज में करीब 10 से 15 हजार सलाई की कलमें भी रोप रहे है। प्रत्येक रेंज में तीन से चार हजार कलमें लगाई जा रही है।


चोरल क्षेत्र में एक बार फिर सागौन के पौधों रोपने पर जोर दिया जा रहा है। लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा सागौन का होगा। वनमंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह का कहना है कि जिन विलुप्त प्रजातियों के पौधे नर्सरियों में तैयार हुए है। उन्हें जंगलों में विशेष तौर पर लगाया जा रहा है। इसके अलावा सलाई गोंद को बढ़ावा देने के लिए कलमें लगा रहे है।

करीब तीन लाख लगाएंगे पौधे

इंदौर वनमंडल में इस वर्ष इंदौर, चोरल, महू और मानपुर क्षेत्र के जंगलों में लगभग 2 लाख 81 हजार पौधे लगाने का टारगेट रखा है। जुलाई और अगस्त के बीच बीस पौधारोपण स्थल चुने गए है। यहां सिर्फ पौधे लगाने पर ही नहीं। बल्कि उनकी सुरक्षा और बेहतर विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पानी रोकने के लिए बनाए चेकडैम

पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके, इसके लिए जंगलों में छोटे-छोटे तालाब, चेकडैम, कंटूर ट्रेंच और अन्य जल संरचनाएं तैयार की गई हैं। पहले से बने तालाबों का गहरीकरण भी कराया गया है। ताकि अधिक से अधिक वर्षा जल संग्रहित हो सके। इससे गर्मियों में वन्य जीवों और पौधों के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहेगी।

वन विभाग पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की भी लगातार निगरानी कर रहा है। समीक्षा में सामने आया कि करीब 20 से 22 प्रतिशत पौधे विभिन्न कारणों से सूख गए हैं। ऐसे लगभग 84 हजार पौधों की पहचान कर ली गई है। अब उनकी जगह नए पौधे लगाने का काम चल रहा है।

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