
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में जिस दूषित पानी से लोग बीमार हुए हैं, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हुई जांच में ई-कोलाई और शिगेला जैसे घातक बैक्टीरिया मिले हैं। अब बैक्टेरिया की विस्तृत जांच के लिए कलकत्ता के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बैक्टिरियोलॉजी से वैज्ञानिकों की टीम इंदौर आएगी। वह भागीरथपुरा से पानी के सैंपल लेगी और बैक्टरीया की विस्तृत जांच करेगी। शनिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम भी इंदौर आई। एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने चाचा नेहरू अस्पताल, एमवाय अस्पताल और भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों से चर्चा की और डाक्टरों से इलाज की जानकारी ली। इस दौरान स्टाफ, इलाज, रेफरल मेकेनिजम, औषधियों की उपलब्धता, रिकॉर्ड संधारण को देखा। इलाज करने वाले डाक्टरों से यह भी पुछा कि दवाई का कौनसा डोज कितनी मात्रा में मरीजों को दिया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से यह भी कहा कि सभी मरीजों को सिर्फ यह नहीं कहना है कि पानी में घोलकर ओआरएस पीएं, उन्हें यह कहना है कि उबले हुए पानी में ओआरएस मिलकर पीएं। दूसरे जिले से बुला रहे विशेषज्ञ इंदौर में बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए दूसरे जिलों से भी विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है। क्योंकि अभी शासकीय संस्थाओं में स्टाफ की कमी बनी हुई है।
24 घंटे तक मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है। अन्य जिलों से एपिडिमियोलाजिस्ट, शिशुरोग विशेषज्ञ, औषधि विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारी भी अन्य जिलों सेवाएं देने इंदौर आए हैं। कलेक्टर ने किया रिंग सर्वे का निरीक्षण भागीरथपुरा क्षेत्र में रिंग सर्वे एवं फॉलोअप सर्वे की स्थिति का जायजा लेने के लिए कलेक्टर शिवम वर्मा पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही गतिविधियों की जानकारी ली, नागरिकों से चर्चा की और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के बारे में समझाया।
उन्होंने बताया कि स्वयंसेवी संस्थाओं के 200 से अधिक सदस्यों के माध्यम से रिंग सर्वे कराया जा रहा है। नागरिकों को टेंकर के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्हें समझाईश दी जा रही है कि पानी उबाल कर पीए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पानी को पूर्णतया सुरक्षित रखने के लिए क्लोरीवेट ड्रॉप वितरित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की टीम अच्छा काम कर रही है। अभी हमने 15 डाक्टर दूसरे जिलों से बुलवाएं है। हम कोरोना की तरह ही कीट भी सप्लाय करेंगे। इस कीट ओआरएस और जिंक दवाई रहेगी। इसके अलावा रेपिड डायग्नोस्टिक कीट कलकत्ता से उपलब्ध करवाई जा रही है। नेशनल इंस्टिट्यूट आफ बैक्टिरियोलाजी, कलकत्ता के वैज्ञानिकों की टीम भी इंदौर आएगी। - डा. सलोनी सिडाना, एमडी, एनएचएम।