
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। पुलिस ने कोर्ट में शोर मापने का एक यंत्र प्रस्तुत कर बताया कि इस तरह के चार उपकरण खरीदे गए हैं, जिन्हें शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जाएगा।
कोर्ट ने पूछा कि इन यंत्रों का उपयोग अब तक क्यों नहीं हुआ और क्या चार यंत्रों से पूरे शहर में शोर पर नियंत्रण संभव है। कीमत पूछने पर पुलिस ने बताया कि प्रत्येक यंत्र डेढ़ लाख रुपये का है।
इस पर याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट अभिनव धनोडकर ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफार्म पर इसी तरह के यंत्र 1400 से 3000 रुपये तक में उपलब्ध हैं। उन्होंने कोर्ट में ही वेबसाइट खोलकर यंत्र की उपलब्धता दिखाई।
वकील ने बताया कि तीन हजार रुपये वाला यंत्र और पुलिस द्वारा डेढ़ लाख में खरीदा गया यंत्र लगभग एक जैसा ही काम करते हैं। कोर्ट ने इस पर आश्चर्य जताया। बहस सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
यह जनहित याचिका अमिताभ उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि तेज शोर से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शोर नियंत्रण का कानून है, लेकिन पालन नहीं हो रहा। कोर्ट पहले भी आदेश दे चुकी है। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा कि हम शोर नियंत्रण के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
इस पर कोर्ट ने पूछा कि रात के समय आपको आवाज नहीं आती क्या। एडवोकेट धनोडकर ने बताया कि याचिकाकर्ता ने तीन सितंबर को रात 11.22 बजे शोर की शिकायत की थी, जबकि पुलिस मौके पर अगले दिन सुबह 9.53 बजे पहुंची।