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इंदौर नगर निगम के ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट पर सवाल: बिचौली हप्सी और हरना गांव के भूजल प्रदूषित होने के लगे आरोप

प्लांट से निकलने वाले दूषित पदार्थ तालाब में डाले जा रहे हैं। इससे तालाब का पानी और आसपास का भू-जल दूषित हो रहा है। कुछ ही दूरी पर हरना बादली गांव है।

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 07 May 2026 09:44:13 AM (IST)Updated Date: Thu, 07 May 2026 09:44:13 AM (IST)
इंदौर नगर निगम के ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट पर सवाल: बिचौली हप्सी और हरना गांव के भूजल प्रदूषित होने के लगे आरोप
इंदौर नगर निगम। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब, सुनवाई 14 मई को
  2. गांव में पानी का स्रोत्र सिर्फ बोरिंग और कुएं हैं, भू-जल दूषित होने से गांव के रहवासियों पर असर पड़ रहा है।
  3. बिचौली हप्सी में ग्रीन-वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट सिटी फारेस्ट और तालाब के बीच स्थापित किया गया है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बिचौली हप्सी में सिटी फारेस्ट के पास पीपीपी मोड में स्थापित निगम के ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट पर सवाल उठने लगे हैं। इसे लेकर हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई है। आरोप है कि इस प्लांट की वजह से क्षेत्र का भू-जल दूषित हो रहा है। कोर्ट ने बुधवार को याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद शासन, नगर निगम और प्लांट संचालित करने वाली एजेंसी को नोटिस जारी कर 14 मई तक जवाब मांगा है।

एडवोकेट हर्षवर्धनसिंह राठौर ने बताया बिचौली हप्सी में ग्रीन-वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट सिटी फारेस्ट और तालाब के बीच स्थापित किया गया है। प्लांट से निकलने वाले दूषित पदार्थ तालाब में डाले जा रहे हैं। इससे तालाब का पानी और तालाब के आसपास का भू-जल दूषित हो रहा है। कुछ ही दूरी पर हरना बादली गांव है। इस गांव में पानी का स्रोत्र सिर्फ बोरिंग और कुएं हैं। भू-जल दूषित होने से गांव के रहवासियों पर असर पड़ रहा है।


हाल ही में प्लांट में आग लगने से यहां का जहरीला मलबा बहकर तालाब में जा रहा है। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि प्लांट जीरो वेस्ट है तो फिर प्रदूषण कैसे फैल सकता है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि ग्रीन वेस्ट के साथ ही कई अन्य चीजें भी आ जाती है।

ग्रीन वेस्ट को खत्म करने के बाद जो पदार्थ निकलता है वह तालाब में डाला जा रहा है। कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने बोर्ड से कहा है कि वह प्लांट, तालाब और आसपास के क्षेत्रों के भू-जल की जांच कर रिपोर्ट पेश करें। अब कोर्ट ने शासन, नगर निगम और प्लांट संचालित करने वाली एजेंसी को नोटिस जारी कर 14 मई तक जवाब मांगा है।