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इंदौर के रानी सराय के तोतों का राम-राम, मुख्यमंत्री को भेजा पैगाम; पेड़ों को बचाने की लगाई गुहार

तोतों का दर्द : हमने सुना है कि रानी सराय के पेड़ों और वहां रहने वाले पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर संकट मंडरा रहा है। अगर पेड़ कट गए तो हम कहां जाएंग...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 09:58:06 AM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 10:08:50 AM (IST)
इंदौर के रानी सराय के तोतों का राम-राम, मुख्यमंत्री को भेजा पैगाम; पेड़ों को बचाने की लगाई गुहार
रानी सराय के तोतों के नाम से मुख्यमंत्री को लिखा पत्र सोशल मीडिया पर हुआ वायरल। - एआई इमेज

HighLights

  1. हम अपने घोंसले कंधे पर लादकर दूसरी जगह नहीं ले जा सकते
  2. हमारे बच्चे अभी उड़ना भी नहीं जानते, हम आपसे कोई महल नहीं मांग रहे
  3. उनका बचपन किसी दूसरे पेड़ पर अचानक नहीं बसाया जा सकता

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रानी सराय परिसर में रहने वाले तोतों के नाम से एक पत्र रविवार दिनभर सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा। इसमें तोतों की ओर से मुख्यमंत्री से पेड़ बचाने की गुहार लगाई गई है। पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री जी, हम रानी सराय के तोते हैं…।

हमारा घर बचा लीजिए। मुख्यमंत्री जी, राम-राम! माफ कीजिएगा, हम तोते हैं। आपकी तरह बोलना तो जानते हैं, लेकिन अपनी पीड़ा खुलकर कह नहीं पाते। आज पहली बार अपनी चहचहाहट को चिट्ठी बना रहे हैं।

उम्मीद है, हमारी आवाज आपके दरबार तक पहुंचेगी। हम इंदौर की रानी सराय में रहने वाले तोते हैं। पीढ़ियों से यहां के पुराने पेड़ों की शाखाएं हमारा घर हैं। किसी डाल पर हमारा बसेरा है, तो किसी खोखल में हमारे बच्चों का संसार।


सुबह होते ही हमारी चहचहाहट से दिन शुरू होता है। हम उड़ते हैं, लौटते हैं, घोंसले बनाते हैं और अपनी अगली पीढ़ी को खुले आसमान में उड़ना सिखाते हैं। मुख्यमंत्री जी, आपने इंदौर को स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में पहचान दिलाते देखा है।

अगर पेड़ कट गए तो हम कहां जाएंगे?

हमारा शहर सुंदर बने, विकास करे, यह हमें भी अच्छा लगता है। आखिर हम भी तो इसी शहर के बाशिंदे हैं, लेकिन एक सवाल हमें रातभर जगाए रखता है - क्या विकास की राह में हमारे पुराने पेड़ों और आशियानों के लिए थोड़ी-सी जगह नहीं बच सकती? हमने सुना है कि रानी सराय के पेड़ों और वहां रहने वाले पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर संकट मंडरा रहा है। अगर पेड़ कट गए तो हम कहां जाएंगे?

हम अपने घोंसले कंधे पर लादकर दूसरी जगह नहीं ले जा सकते। हमारे बच्चे अभी उड़ना भी नहीं जानते। उनका बचपन किसी दूसरे पेड़ पर अचानक नहीं बसाया जा सकता। हम आपसे कोई महल नहीं मांग रहे, न कोई सुविधा।

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बस अपना घर मांग रहे हैं

वे पेड़, जिनकी शाखाओं पर हमारा जीवन टिका है। हमारी विनती है कि किसी भी कटाई या निर्माण से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों से पर्यावरणीय आकलन कराया जाए। पक्षियों के घोंसलों और प्राकृतिक आवास की रक्षा सुनिश्चित हो। संभव हो तो परियोजना की रूपरेखा ऐसी बने कि पुराने पेड़ बचाए जा सकें।

मुख्यमंत्री जी, पेड़ हमारे लिए केवल लकड़ी नहीं, घर हैं। डालियां केवल शाखाएं नहीं, हमारे बच्चों का भविष्य हैं। आज हम चुप रहे, तो कल रानी सराय की सुबह हमारी चहचहाहट के बिना हो सकती है। कल जब इंदौर के बच्चे पूछेंगे कि तोते कहां चले गए, तब उन्हें हमारी कहानी मत सुनाइएगा - हमें यहीं रहने दीजिएगा।

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