फीस के लिए बार-बार टोकना भी 'प्रताड़ना'
प्राइवेट स्कूलों में समय पर फीस जमा नहीं करने पर बच्चों को 'टोकना' भी प्रताड़ना की श्रेणी में आएगा।
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Publish Date: Tue, 10 Apr 2018 12:11:25 PM (IST)
Updated Date: Tue, 10 Apr 2018 12:19:35 PM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। प्राइवेट स्कूलों में समय पर फीस जमा नहीं करने पर बच्चों को 'टोकना' भी प्रताड़ना की श्रेणी में आएगा। शिक्षक बच्चों से फीस के बारे में बात नहीं करेंगे। अगर फीस नहीं भर पाने के तनाव में बच्चों ने कोई आत्मघाती कदम उठाया तो इसके लिए स्कूल प्रबंधन जिम्मेदार होगा। शिक्षा अधिकार कानून और किशोर न्याय अधिनियम के तहत स्कूल में बच्चों को फीस भरने के लिए प्रताड़ित करना अपराध की श्रेणी में आएगा।
बाल अधिकार आयोग के पास छात्र व अभिभावकों की शिकायतें पहुंचने के बाद यह फैसला लिया गया है। आयोग के मुताबिक फीस की प्रताड़ना से तंग आकर कई बच्चों ने आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठा लिए हैं। जबकि फीस का मुद्दा सिर्फ अभिभावक और स्कूल के बीच का है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को सिर्फ अभिभावकों से ही बात करना चाहिए। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। अब सभी स्कूलों में फीस भरने के लिए दबाव बनाना शुरू होगा।
शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक फीस नहीं भर पाने के कारण बच्चे को पढ़ाई से वंचित नहीं रख सकेंगे। न बच्चों को कक्षा के बाहर खड़ा करेंगे न परीक्षा में नहीं बैठाने की धमकी देंगे। मप्र शासन शिक्षा विभाग के उपसचिव प्रमोद सिंह के मुताबिक फीस वित्तीय विषय है, इसका बच्चों से कोई लेना-देना नहीं है। सभी स्कूलों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है। स्कूल की शिकायत मिलने पर शिक्षा अधिकार कानून व किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई होगी। इसमें स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध सजा का प्रावधान है।