
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई गंभीर घटना के बाद नगर निगम की नींद खुली है। पिछले दो दिनों से निगम की टीमें क्षेत्र की गलियों में नर्मदा जल लाइन के लीकेज की जांच में जुटी हैं। इस दौरान निगम की लापरवाही और अजीब इंजीनियरिंग का चौंकाने वाला सच सामने आया है।
जांच में पाया गया कि क्षेत्र की अधिकांश गलियों में नर्मदा जल सप्लाई लाइन के ठीक ऊपर ड्रेनेज लाइन बिछाई गई है। इतना ही नहीं, ड्रेनेज के चैंबर भी नर्मदा लाइन के ऊपर ही बनाए गए हैं।
इस पूरे मामले की जड़ नवंबर 2024 से जुड़ी है, जब इलाके में नई ड्रेनेज लाइन डाली जानी थी। रहवासियों ने मांग की थी कि ड्रेनेज लाइन घरों के पीछे बैकलेन से बिछाई जाए, क्योंकि वहां पर्याप्त जगह है। लेकिन भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने विरोध किया। पार्षद व रहवासी आमने-सामने आ गए और विवाद इतना बढ़ा कि पार्षद धरने पर बैठ गए। फिर निगम ने ड्रेनेज लाइन का काम ही रोक दिया।
रहवासी पार्षद के रवैये पर बेहद नाराज हैं। आरोप है कि वे छह महीनों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे। भागीरथपुरा टंकी पर निगमकर्मी की जगह पार्षद के कार्यकर्ता बैठते थे, जो शिकायत तो दर्ज करते थे, लेकिन जोनल कार्यालय के कर्मचारी शिकायत मिलने से इन्कार कर रहे हैं। रहवासी पुरुषोत्तम यादव ने कहा वे समस्या लेकर पार्षद के घर जाते थे, तो कभी सुना नहीं जाता था।
पार्षद कमल वाघेला से नईदुनिया की सीधी बात
नर्मदा और ड्रेनेज लाइन गड़बड़ी क्यों है?
पूरे क्षेत्र में नर्मदा के ऊपर ड्रेनेज लाइन निकली है। इसे व्यवस्थित किया जा रहा है। अभी तक 40 फीसद इलाके में नई लाइन बिछाई गई है। कुछ गलियों में आज भी सीमेंट की लाइन डाली हुई है।
आपके करीबियों को लाइन बिछाने के ठेके दिए क्या?
शक्ति चंदेरिया और महेश बिंजवाल ने महज दस फीसद से ज्यादा काम नहीं किया है। वैसे लाइन बदलने के लिए चार ठेकेदारों को काम सौंपा गया है।
पानी में बदबू आने की शिकायत की थी जनता ने?
पूरे क्षेत्र में नर्मदा और ड्रेनेज लाइन की जांच हुई है। अभी तक लीकेज नहीं मिला है। यह जरूर है कि लोगों ने कुछ दिन पहले पानी से बदबू आने के बारे में बताया था। इसके बारे में महापौर, निगमायुक्त और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी बताई है।
गंदे पानी और पीने के पानी की लाइनें एक-दूसरे के बेहद करीब होने के कारण दूषित पानी नर्मदा लाइन में मिल गया है। मंगलवार को नर्मदा परियोजना के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव ने गली नंबर 2 में बने गलत चैंबर पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद बुधवार को निगम की टीम मौके पर पहुंची और तीन से चार चैंबर तोड़े गए, जो नर्मदा लाइन के ऊपर बने थे। ड्रेनेज और नर्मदा लाइन को अलग-अलग किया गया और कुछ चैंबरों के स्थान भी बदले गए।
चैंबर तोड़ने में निगमकर्मियों को काफी परेशानी हुई, क्योंकि पहले उन्हें चैंबर पूरी तरह खाली करना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि ड्रेनेज और नर्मदा लाइन को बेहद अस्त-व्यस्त तरीके से बिछाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि निचले स्तर के अधिकारी और ठेकेदार मनमानी कर रहे थे और किसी ने निगरानी नहीं की।