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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 11, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सनातन धर्म में शामिल उर्दू-फारसी के शब्दों को हटाने, 13 अखाड़े, सप्त पुरी व चार कुंभ नगरियों के संत करेंगे मंथन

प्राथमिक तौर पर 50 शब्दों की सूची बनाई जा रही है। इनमें शाही को राजसी, सवारी को पालकी या यात्रा, पेशवाई को छावनी प्रवेश, शाही स्नान को अमृत या दिव्य स...और पढ़ें

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 11 Sep 2024 08:48:19 AM (IST)Updated Date: Wed, 11 Sep 2024 09:20:19 AM (IST)
सनातन धर्म में शामिल उर्दू-फारसी के शब्दों को हटाने, 13 अखाड़े, सप्त पुरी व चार कुंभ नगरियों के संत करेंगे मंथन
महाकाल की शाही सवारी का नाम बदलकर महाकाल की राजसी सवारी किया गया है। फाइल फोटो

HighLights

  1. यूपी के प्रयागराज में पूर्ण कुंभ मेला 13 जनवरी 2025 से आरंभ होगा।
  2. इससे पहले बोलचाल में शामिल मुगलिया छाप शब्दों को हटाए जाएंगे।
  3. इनके स्थान पर सूची में संस्कृत, तमिल, हिंदी के शब्द का उपयोग होगा।

ईश्वर शर्मा, नईदुनिया उज्जैन/इंदौर। सनातन धर्म में घुस आए इस्लामिक छाप शब्दों को हिंदुओं की पूजा, साधना व उपासना पद्धति से निकालने तथा उनके स्थान पर संस्कृतनिष्ठ व हिंदी के शब्दों को प्रचलन में लाने का अभियान अब देशव्यापी हो चला है।

महाकाल की सवारी से 'शाही' शब्द हटाने को लेकर नईदुनिया में बीते सप्ताह खबर छपने के बाद मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सवारी को 'शाही' के स्थान पर 'राजसी' कहा था। अब इस 'शब्द शुद्धिकरण यज्ञ' में सनातन धर्म के 13 अखाड़ों, सप्त पुरियों तथा चारों कुंभ नगरियों के साधु-संत भी एकमत हो रहे हैं।


इसका बीड़ा उज्जैन के साधु-संतों व विद्वानों ने उठाया है। योजना बन रही है कि इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर विमर्श खड़ा किया जाए। इसके तहत 13 अखाड़ों के साधुओं, सप्तपुरियों में निवासरत प्रमुख धर्माचार्यों व चार कुंभ नगरियों के साधु-संतों के साथ विचार-मंथन किया जाएगा।

अब तक यह हुआ

  • 2 सितंबर 2024 : नईदुनिया ने महाकाल की सवारी से शाही शब्द हटाने का मुद्दा उठाया। साधु-संत और विद्वानों ने दिया समर्थन।
  • 2 सितंबर : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाही सवारी को राजसी सवारी कहकर अभियान को स्वीकृति दी। उज्जैन प्रशासन ने प्रेसनोट में भी राजसी सवारी लिखा।
  • 3 सितंबर : मुद्दा उज्जैन से निकल कर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा। कई धर्मनगरियों में उठी आवाज।
  • 5 सितंबर : हरिद्वार के संत समाज ने हिंदू धार्मिक संदर्भों से उर्दू शब्द हटाने व हिंदी, संस्कृत के शब्दों को लाने की मांग रखी।
  • 6 सितंबर : अभा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा- प्रस्ताव बनाकर सभी कुंभ नगरियों के प्रशासन को भेजेंगे।

संस्कृति के अनुरूप शब्दों का प्रयोग

शाही, पेशवाई जैसे शब्द भारतीय संस्कृति की परंपरा के नहीं हैं। शीघ्र ही सभी अखाड़ों की बैठक बुलाकर शाही और पेशवाई सहित उर्दू, फारसी के अन्य शब्दों को हटाने तथा भारतीय संस्कृति के अनुरूप शब्दों का प्रयोग करने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा। - महंत रविंद्र पुरी, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद

प्रयाग कुंभ से पहले हो जाएगा निर्णय

प्रयागराज में पूर्ण कुंभ मेला 13 जनवरी 2025 से आरंभ होगा। इससे पहले सनातन के बोलचाल में शामिल इस्लामिक, मुगलिया छाप शब्दों को खोजने व उनकी सूची बनाने का काम किया जाएगा। यह सूची राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित सभी राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों को भेजी जाएगी।

इसके साथ भेजे पत्र में अनुरोध किया जाएगा कि सनातन से जुड़े दस्तावेजों में उर्दू और फारसी के इन सूचीबद्ध शब्दों का उपयोग बंद हो। उनके स्थान पर सूची में संस्कृत, तमिल, हिंदी के शब्द सुझाएंगे।