इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। फर्जी फैसला कांड के मुख्य आरोपित संतोष पुत्र रूमालसिंह वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। वह 10 जुलाई 2021 से जेल में है। मामले में गठित एसआइटी छह महीने बाद भी आरोपित के खिलाफ अंतिम जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं कर सकी। वर्मा ने इसी बात को आधार बनाकर जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने सोमवार को स्वीकार कर लिया। सुप्रीम कोर्ट की साइट पर इसकी पुष्टि भी हो रही है। हालांकि देर रात तक आदेश अपलोड नहीं हुआ था।

गौरतलब है कि संतोष वर्मा राज्य प्रशासनिक सेवा का अधिकारी है। आरोप है कि वर्मा ने अपने खिलाफ जिला कोर्ट में चल रहे एक मामले में कोर्ट का फर्जी फैसला तैयार कराकर उसे सामान्य प्रशासन विभाग में प्रस्तुत किया ताकि उसे आइएएस अवार्ड मिल सके। इस फैसले के आधार पर वर्मा ने आइएएस अवार्ड हासिल भी कर लिया। फर्जी आदेश पर जिस कोर्ट की मुहर लगी थी उसी कोर्ट के न्यायाधीश ने वर्मा के खिलाफ एमजी रोड पुलिस थाने पर शिकायत दर्ज कराई। 10 जुलाई को पुलिस ने वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वह जेल में है। जिला कोर्ट और हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की थी। वरिष्ठ अभिभाषक मुकुल रोहतगी और एडवोकेट नवीन सिंह ने वर्मा की तरफ से तर्क रखे।

छह माह से जेल में था

जिला कोर्ट में वर्मा की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट राम बजाड़ गुर्जर ने बताया कि हमने सुप्रीम कोर्ट में तर्क रखे कि मामले में चालान पेश हो चुका है। वर्मा प्रशासनिक अधिकारी है और छह महीने से जेल में है। मामले को लेकर गठित एसआइटी छह महीने बाद भी अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं कर सकी है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश ने तर्क सुनने के बाद जमानत याचिका स्वीकार कर ली। हालांकि आदेश रविवार रात तक अपडेट नहीं हुआ था।

Posted By: Hemraj Yadav

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