
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम में हुए फर्जी नामांतरण मामले में संपत्तिकर रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच के दौरान यह भी पता चला है कि ये फर्जी नामांतरण जनवरी से मार्च 2026 के बीच किए गए थे। इनमें संपत्तिकर खातों में संपत्ति स्वामियों के नाम बदले गए। चौकाने वाली बात तो यह है कि आरोपितों ने इस फर्जीवाड़े को रात 10 से सुबह तीन बजे के बीच अंजाम दिया।
जिन संपत्तियों के फर्जी नामांतरण किए गए उनमें से ज्यादातर में पारिवारिक विवाद था और ये प्रकरण सालों से लंबित थे। यह बात भी सामने आई है कि ज्यादातर फर्जी नामांतरण उपायुक्त केशव सगर की आईडी से किए गए थे, जबकि कुछ उपायुक्त प्रदीप जैन की आईडी से बदले गए थे। जिस सफाई से फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है, उससे आशंका है कि यह काम निगम की कार्यप्रणाली से परिचित व्यक्ति द्वारा ही किया गया है।
आरोपितों को अधिकारियों की लॉगिन आईडी की जानकारी थी। अब जांच आईपी एड्रेस पता लगाने पर अटकी है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल का कहना है कि आईपी एड्रेस से यह स्पष्ट हो जाएगा कि फर्जीवाड़े के लिए किन कंप्यूटरों का उपयोग किया गया था। इसके बाद फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
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गौरतलब है कि पिछले दिनों नगर निगम में नामांतरण फर्जीवाड़ा सामने आया था। यह बात सामने आई थी कि अलग-अलग जोन में लंबित नामांतरण के ऐसे मामले जिनमें विवाद चल रहा था, एक ही दिन में दो उपायुक्त के.एस. सगर और प्रदीप जैन की आईडी से निराकृत हो गए। मामले में शिकायत के बाद जांच हुई तो पता चला कि ऐसे 350 से ज्यादा मामले हैं, जिनमें फर्जी नामांतरण किया गया है।
पूछताछ हुई तो उपायुक्तों ने कहा कि यह उन्होंने नहीं किया, आईडी ऑपरेटरों के पास रहता है। इधर ऑपरेटरों ने भी कह दिया कि यह उन्होंने नहीं किया। मामले में निगमायुक्त ने नोटिस जारी किए थे; बताया जा रहा है कि नोटिस के जवाब आ गए हैं।