• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

इंदौर नगर निगम में घोटाला, 350 से ज्यादा संपत्तियों का फर्जी नामांतरण, रात 10 से सुबह 3 बजे के बीच हुआ 'खेल'

नगर निगम में हुए फर्जी नामांतरण मामले में संपत्तिकर रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच के दौरान यह भी पता चला है ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 11:03:17 PM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 07:13:04 AM (IST)
इंदौर नगर निगम में घोटाला, 350 से ज्यादा संपत्तियों का फर्जी नामांतरण, रात 10 से सुबह 3 बजे के बीच हुआ 'खेल'
नगर निगम में फर्जी नामांतरण कांड। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. पारिवारिक विवाद वाली संपत्तियों को बनाया निशाना
  2. निगम फर्जीवाड़े की कड़ियां सुलझाने में जुटी पुलिस
  3. उपायुक्तों की ID से संपत्तियों का फर्जी नामांतरण

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम में हुए फर्जी नामांतरण मामले में संपत्तिकर रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच के दौरान यह भी पता चला है कि ये फर्जी नामांतरण जनवरी से मार्च 2026 के बीच किए गए थे। इनमें संपत्तिकर खातों में संपत्ति स्वामियों के नाम बदले गए। चौकाने वाली बात तो यह है कि आरोपितों ने इस फर्जीवाड़े को रात 10 से सुबह तीन बजे के बीच अंजाम दिया।

निगम की कार्यप्रणाली से परिचित व्यक्ति द्वारा ही किया गया

जिन संपत्तियों के फर्जी नामांतरण किए गए उनमें से ज्यादातर में पारिवारिक विवाद था और ये प्रकरण सालों से लंबित थे। यह बात भी सामने आई है कि ज्यादातर फर्जी नामांतरण उपायुक्त केशव सगर की आईडी से किए गए थे, जबकि कुछ उपायुक्त प्रदीप जैन की आईडी से बदले गए थे। जिस सफाई से फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है, उससे आशंका है कि यह काम निगम की कार्यप्रणाली से परिचित व्यक्ति द्वारा ही किया गया है।


अधिकारियों की लॉगिन आईडी का हुआ इस्तेमाल

आरोपितों को अधिकारियों की लॉगिन आईडी की जानकारी थी। अब जांच आईपी एड्रेस पता लगाने पर अटकी है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल का कहना है कि आईपी एड्रेस से यह स्पष्ट हो जाएगा कि फर्जीवाड़े के लिए किन कंप्यूटरों का उपयोग किया गया था। इसके बाद फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

यह भी पढ़ें- LPG New Rule: नए घरेलू गैस कनेक्शन पर लगी रोक, भोपाल में ऑनलाइन पोर्टल बंद होने से 8 हजार आवेदन अटके

विवादित मामले एक ही दिन में हुए निराकृत

गौरतलब है कि पिछले दिनों नगर निगम में नामांतरण फर्जीवाड़ा सामने आया था। यह बात सामने आई थी कि अलग-अलग जोन में लंबित नामांतरण के ऐसे मामले जिनमें विवाद चल रहा था, एक ही दिन में दो उपायुक्त के.एस. सगर और प्रदीप जैन की आईडी से निराकृत हो गए। मामले में शिकायत के बाद जांच हुई तो पता चला कि ऐसे 350 से ज्यादा मामले हैं, जिनमें फर्जी नामांतरण किया गया है।

पूछताछ हुई तो उपायुक्तों ने कहा कि यह उन्होंने नहीं किया, आईडी ऑपरेटरों के पास रहता है। इधर ऑपरेटरों ने भी कह दिया कि यह उन्होंने नहीं किया। मामले में निगमायुक्त ने नोटिस जारी किए थे; बताया जा रहा है कि नोटिस के जवाब आ गए हैं।