
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने वर्षों पहले जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और प्रशिक्षित स्टाफ जैसे कई नियम लागू किए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और परिवहन विभाग की गाइडलाइन के बाद इन नियमों को अनिवार्य बनाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी संतोषजनक नहीं है।
बीते माह यातायात पुलिस द्वारा 100 से अधिक स्कूल और कॉलेजों के ट्रांसपोर्ट अधिकारियों की बैठक लेकर नियमों के पालन की हिदायत दी गई थी। परिवहन विभाग भी दो माह में एक दर्जन से अधिक स्कूल बसों पर कार्रवाई कर चुका है। इससे साफ है कि वर्षों बाद भी व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है।
शहर में सैकड़ों स्कूल बसें और वैन आटो प्रतिदिन लाखों बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ती हैं। कई बसों में जीपीएस और सीसीटीवी लगे तो हैं, लेकिन वे चालू हैं या नहीं, इसकी नियमित जांच नहीं होती। स्पीड गवर्नर से छेड़छाड़ की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। दूसरी ओर स्कूल बसों की फीस में लगातार कई गुना वृद्धि हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था उसी अनुपात में मजबूत नहीं हो सकी।
जानकारों का कहना है कि जिम्मेदार विभागों को केवल बैठकें लेने के बजाय नियमित निरीक्षण, तकनीकी जांच और कार्रवाई करनी होगी। आरटीओ प्रदीप शर्मा का कहना है कि बच्चों के परिवहन में उपयोग किए जाने वाले वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। स्कूल परिसरों में पहुंचकर बसों के कागज जांचने के साथ ही आपातकालीन द्वार, सेफ्टी कीट सहित अन्य गाइडलाइन की जांच कर रहे हैं। गौरतलब है कि अधिकांश अभिभावकों को बस की तकनीकी सुरक्षा की जानकारी नहीं होती है। इसलिए वह देखकर भी अनदेखी कर देते हैं।
स्कूल बसों के अलावा स्कूली बच्चों के परिवहन में ऑटो और वैन का उपयोग हो रहा है। इनमें नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है। तय क्षमता से अधिक बच्चों का परिवहन होने से हमेशा हादसे का अंदेशा बना रहता है। बीते सप्ताह परिवहन विभाग ने नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तीन मारूति ओमनी वैन एवं एक ऑटो रिक्शा को जब्त किया था। मोटरयान अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन पर वाहन संचालकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई करते हुए 23 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया।
- कार्यरत जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य।
- अंदर और प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरे।
- अधिक गति रोकने के लिए स्पीड गवर्नर।
- प्रशिक्षित चालक व परिचालक एवं पुलिस सत्यापन।
- फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और इमरजेंसी गेट।
- स्कूल का नाम, हेल्पलाइन नंबर और वाहन विवरण अंकित हो।
- जीपीएस और सीसीटीवी बंद या खराब मिलना।
- ओवरलोडिंग और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना।
- चालक का समय-समय पर प्रशिक्षण नहीं होना।
- वाहनों की नियमित फिटनेस जांच में लापरवाही।
- तेज गति पर प्रबंधन नहीं करता कार्रवाई।
- हर तीन माह में स्कूल बसों का विशेष ऑडिट।
- जीपीएस और सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग।
- नियम तोड़ने पर स्कूलों पर जुर्माना और परमिट निलंबन।
- दोहराई गई लापरवाही पर वाहन जब्ती और रजिस्ट्रेशन निलंबन।
- परिवहन, शिक्षा विभाग और यातायात पुलिस चलाए संयुक्त अभियान।
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