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इंदौर में HPV वैक्सीन पर अफवाहों का साया; आशा कार्यकर्ताओं से लोग कह रहे- लिखकर गारंटी दो, बच्ची को कुछ नहीं होगा, तभी लगवाएंगे

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए देशभर में एचपीवी वैक्सीन सरकार की तरफ से निशुल्क लगवाई जा रही है। लेकिन लोगों में इसे लेकर भ्रांतियां कम नहीं हो रही हैं...और पढ़ें

By Vinay YadavEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 21 Mar 2026 09:26:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Mar 2026 09:26:44 PM (IST)
इंदौर में HPV वैक्सीन पर अफवाहों का साया; आशा कार्यकर्ताओं से लोग कह रहे- लिखकर गारंटी दो, बच्ची को कुछ नहीं होगा, तभी लगवाएंगे
बच्चियों का वैक्सीनेशन करते हुए।

HighLights

  1. इंदौर में HPV वैक्सीन पर 'अफवाहों' का ग्रहण
  2. बांझपन की अफवाह ने रोकी टीकाकरण की रफ्तार
  3. एचपीवी वैक्सीन पर भ्रम फैलाया तो होगी कार्रवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए देशभर में एचपीवी वैक्सीन सरकार की तरफ से निशुल्क लगवाई जा रही है। लेकिन लोगों में इसे लेकर भ्रांतियां कम नहीं हो रही हैं। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाने की समझाइश दे रही हैं। लेकिन कई जगह लोग कह रहे हैं कि पहले लिखकर गारंटी दो कि बच्ची को कुछ नहीं होगा, तभी वैक्सीन लगवाएंगे।

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के कारण टीकाकरण अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई है। ऐसे में विभाग अब वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है। ऐसे लोगों की सूची बनाकर पुलिस को सौंपी जाएगी।


लक्ष्य से पीछे स्वास्थ्य विभाग

स्वास्थ्य विभाग ने शहर में करीब 33 हजार बालिकाओं को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अभियान के 19 दिनों में केवल 1229 बालिकाओं को ही टीका लग पाया है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए चलाए जा रहे अभियान को लेकर लोगों में डर और भ्रांतियां दोनों हैं।

अधिकारियों के मुताबिक वैक्सीनेशन को लेकर इंटरनेट मीडिया पर गलत जानकारी फैल रही है। कुछ वीडियो और पोस्ट के जरिए यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि एचपीवी वैक्सीन लगवाने से भविष्य में बांझपन (इनफर्टिलिटी) हो सकता है। इसी कारण कई माता-पिता अपनी बेटियों को टीका लगवाने से इनकार कर रहे हैं।

विरोध के अलग-अलग कारण

केस एक: महू के एक गांव में आशा कार्यकर्ता जब एक परिवार के घर पहुंची और उनकी किशोरी बेटी को एचपीवी वैक्सीन लगवाने की सलाह दी, तो परिजनों ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले लिखकर दें कि इस वैक्सीन से बच्ची को भविष्य में कोई दिक्कत नहीं होगी। काफी समझाने के बाद भी परिवार तैयार नहीं हुआ।

केस दो: सांवेर क्षेत्र में एक परिवार ने वैक्सीनेशन से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने मोबाइल पर वीडियो देखा है, जिसमें बताया गया है कि इस वैक्सीन से इनफर्टिलिटी हो जाती है। परिवार का कहना था कि वे अपनी बेटी के भविष्य के साथ कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। आशा कार्यकर्ता ने उन्हें वैज्ञानिक जानकारी दी, लेकिन वे आश्वस्त नहीं हो सके।

केस तीन: इंदौर शहर के एक इलाके में लोगों ने कोरोना वैक्सीन का उदाहरण देते हुए एचपीवी वैक्सीन पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद हार्ट अटैक के मामले बढ़े हैं, इसलिए अब वे कोई नई वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते। स्वास्थ्यकर्मियों ने समझाया कि दोनों वैक्सीन अलग हैं, फिर भी परिवार ने टीका लगवाने से इनकार कर दिया।

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जागरूकता के प्रयास

विशेषज्ञों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है, जो एचपीवी वायरस के संक्रमण से होता है। समय पर वैक्सीन लगवाने से इस बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. तरुण गुप्ता के मुताबिक एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसे दुनिया के कई देशों में वर्षों से लगाया जा रहा है। इसका बांझपन से कोई संबंध नहीं है। यह वैक्सीन केवल उस वायरस से बचाव करती है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकता है।

स्वास्थ्य विभाग अब अभियान को तेज करने की तैयारी में है। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई जा रही है।