यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Shri Krishna: मध्य प्रदेश में जहां-जहां पड़े श्रीकृष्ण के चरण, वे स्थल बनेंगे तीर्थ
Shri Krishna: धार जिले के अमझेरा, कोद और उज्जैन में तीर्थ क्षेत्र के साथ बन सकते हैं पर्यटन केंद्र।
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Sat, 23 Dec 2023 08:19:29 AM (IST)Updated Date: Sat, 23 Dec 2023 11:48:25 AM (IST)
मध्य प्रदेश में जहां-जहां पड़े श्रीकृष्ण के चरण, वे स्थल बनेंगे तीर्थHighLights
- पवित्र स्थलों में उज्जैन का सांदीपनि आश्रम, ग्राम नारायणा तथा धार जिले के अमझेरा व बदनावर क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।
- मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए इन स्थलों पर सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद जागी है।
- सुविधाएं बढ़ने पर ये सभी स्थल तीर्थ सहित पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
Shri Krishna: टीम नईदुनिया, मालवा-निमाड़। प्रदेश में जहां-जहां भी भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े, उन्होंने लीलाएं रचीं, उन सभी पवित्र स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किए जाने की मोहन यादव सरकार ने घोषणा की है। इन पवित्र स्थलों में उज्जैन का सांदीपनि आश्रम, ग्राम नारायणा तथा धार जिले के अमझेरा व बदनावर क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए इन स्थलों पर सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद जागी है। सुविधाएं बढ़ने पर ये सभी स्थल तीर्थ सहित पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
अमझेरा में किया था माता रुक्मिणी हरण
धार जिले की प्राचीन नगरी
अमझेरा में माता रुक्मिणी हरण स्थल है। धार्मिक व पौराणिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने अमझेरा स्थित अतिप्राचीन अंबिकालय (अमका-झमका माता मंदिर) से रुक्मिणी जी का हरण किया था। रुक्मिणी हरण पश्चात उन्हें द्वारिका लेकर गए थे। इस दौरान रुक्मिणी के भाई रुखमी ने भगवान श्रीकृष्ण से युद्ध किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें परास्त कर दिया था।
श्री कोटेश्वर महादेव धाम में किया था पूजन
धार जिले के
बदनावर क्षेत्र के ग्राम कोद में अतिप्राचीन श्री कोटेश्वर महादेव धाम भगवान श्रीकृष्ण की रजोभूमि है। महाभारतकालीन उक्त मंदिर का श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में उल्लेख है। भगवान श्रीकृष्ण जब रुक्मिणी का हरण करने के लिए कुंदनपुर (अमझेरा) जा रहे थे, तब उन्होंने यहां रात्रि विश्राम कर महादेव का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की थी। पश्चात द्वारिका लौटते समय भी वे यहां रुके और रुक्मिणी के साथ पुनः अभिषेक किया था। इसके अवशेष आज भी मौजूद हैं।
सांदीपनि आश्रम में ली थी शिक्षा, भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम
उज्जैन में स्थित सांदीपनि आश्रम भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलदाऊ के साथ यहां गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण करने आए थे। उन्होंने गुरु सांदीपनि से चार दिन में चार वेद, छह दिन में छह शास्त्र, 18 दिन में अट्ठारह पुराण, 16 कला व 64 विद्या के साथ गीता का ज्ञान प्राप्त किया।
स्वर्ण गिरी पर्वत पर भगवान लेने गए थे लकड़ियां
ग्राम नारायणा में भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा का मैत्री स्थल है। इसी के समीप
महिदपुर तहसील के ग्राम चिरमिया में स्वर्ण गिरी पर्वत स्थित है। धार्मिक व पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरुमाता के आदेश पर श्रीकृष्ण व सुदामा भोजनशाला के लिए इसी स्वर्ण गिरी पर्वत पर लकड़ियां लेने आए थे।
भगवान के चरण पड़ने से यह पर्वत सोने का हो गया। मान्यता है आज भी वर्ष में एक बार यह पर्वत एक पल के लिए सोने सी चमक बिखेरता है। इस पर्वत के पत्थरों को बजाने पर घंटी की तरह नाद होता है।