
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सिमकार्ड लेने पहुंचे ग्राहक को शायद ही अंदाजा हो कि उसके आधार कार्ड से उसके नाम पर कोई दूसरा सिमकार्ड भी जारी हो सकता है। राज्य साइबर सेल ने ऐसे ही एक मामले का खुलासा किया है, जिसमें आरोपी ने ग्राहकों के आधार और केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 101 सिमकार्ड फर्जी तरीके से एक्टिवेट कर डाले।
सिम एक्टिवेशन के लिए जरूरी लाइव फोटो में भी आरोपी ने ग्राहकों की जगह अपनी फोटो लगा दी। आरोपी निजी टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी है। एसपी (साइबर) सव्यसाची सर्राफ के अनुसार, ऑपरेशन फास्ट-2.0 के तहत कार्रवाई गई। पुलिस ने मांगलिया निवासी राजकुमार यदुवंशी को गिरफ्तार किया।
मूलतः होशंगाबाद जिले का रहने वाला राजकुमार दस वर्षों से सिमकार्ड बेचने और एक्टिवेट करने का काम करता था। आरोपी ने पांच-छह मोबाइल और सिमकार्ड दुकानों के नाम का दुरुपयोग कर खुद को आइडिया (वीआई) कंपनी के पीओएस एजेंट के रूप में पंजीकृत करा लिया था।
पीओएस एजेंट के जरिये ग्राहक के आधार और केवाईसी दस्तावेज लेकर सिमकार्ड एक्टिवेट किया जाता है। इस प्रक्रिया में ग्राहक की लाइव फोटो के साथ पीओएस एजेंट की भी लाइव फोटो एप पर अपलोड की जाती है। पुलिस का दावा है कि राजकुमार ने इसी प्रक्रिया में सेंध लगाई। सिमकार्ड लेने आए ग्राहकों के आधार और केवाईसी दस्तावेज तो उनके ही रखे, लेकिन ग्राहक की लाइव फोटो की जगह अपनी फोटो अपलोड कर दी।
वहीं पीओएस एजेंट की फोटो के स्थान पर उसने अपनी महिला मित्रों और रिश्तेदार महिलाओं की तस्वीरों का इस्तेमाल किया। इस तरह अलग-अलग दस्तावेजों पर कुल 101 सिमकार्ड एक्टिवेट कर दिए गए। अब साइबर सेल यह पता लगा रही है कि आरोपी ने ये सिमकार्ड किसे दिए और इनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।