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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 07, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इंदौर में मनरेगा हितग्राहियों को दिया बकरी पालन का विशेष प्रशिक्षण, कम निवेश में लाभ का व्यवसाय

हितग्राहियों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक से बकरी पालन व्यवसाय करने से वे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Mon, 07 Feb 2022 02:49:50 PM (IST)Updated Date: Mon, 07 Feb 2022 02:49:49 PM (IST)
इंदौर में मनरेगा हितग्राहियों को दिया बकरी पालन का विशेष प्रशिक्षण, कम निवेश में लाभ का व्यवसाय

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान बैंक आफ बड़ौदा (आरसेटी) इंदौर द्वारा मनरेगा हितग्राहियों के लिए 10 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम विकासखंड महू के ग्राम छापरिया में रखा गया। प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम में आरसेटी निदेशक ओमप्रकाश मंशारामानी ने हितग्राहियों को बकरी पालन व्यवसाय को लघु स्तर से प्रारंभ कर वृहद स्तर तक ले जाने की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कम निवेश में अधिक से अधिक लाभ कमाने का व्यवसाय बकरी पालन व्यवसाय है। इस व्यवसाय को पार्ट या फुल टाइम करके अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। दरअसल बकरी पालन ऐसा व्यवसाय है जिसमें गांव के लोग कम पैसे और संसाधनों में भी अपना व्यवसाय कर सकते हैं। खेत और जंगल में उगने वाली झाड़ियों की पत्तियों से भी बकरी की खुराक बन जाती है लेकिन बकरियों के पालन-पोषण पर थोड़ा अधिक ध्यान देने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बेंगलुरु (नेसर) से आए मूल्यांकनकर्ता भारत भूषण शुक्ला एवं दीपक राय ने प्रशिक्षुओं का मूल्यांकन किया। उन्होंने बताया कि सभी प्रशिक्षुओं ने परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। सभी हितग्राहियों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक से बकरी पालन व्यवसाय करने से वे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पहले से बकरी पालन कर रहे लोग भी तकनीक को अपनाकर लाभ बढ़ा सकते हैं। गौरतलब है मनरेगा के तहत सरकार हितग्राहियों को जीवनयापन के लिए रोजगार मुहैया करा रही है। साथ ही यह भी सुनिश्चित कर रही है कि उन्हें अपना शहर छोड़कर काम की तलाश में अन्य जगह नहीं जाना पड़े। साथ ही उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण देने का काम भी किया जा रहा है।