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इंदौर में रफ्तार का कहर: 31 ब्लैक स्पॉट पर साढ़े तीन साल में गईं 239 जानें, इनमें से 10 स्पॉट बेहद खतरनाक

चमकते शहरी रास्तों के मुकाबले ग्रामीण हाईवे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं। जिले के कुल 31 ब्लैक स्पॉट में से 16 शहर में और 15 ग्रामीण इलाकों में हैं...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 09:45:05 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 09:46:52 AM (IST)
इंदौर में रफ्तार का कहर: 31 ब्लैक स्पॉट पर साढ़े तीन साल में गईं 239 जानें, इनमें से 10 स्पॉट बेहद खतरनाक
इंदौर में बढ़ रहा रफ्तार का कहर। (एआई इमेज)

HighLights

  1. इंदौर जिले में 31 ब्लैक स्पॉट (हादसा संभावित क्षेत्र) चिन्हित किए गए हैं
  2. यहां साल 2023 से अब तक कुल 290 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, इन हादसों में अब तक 239 लोग जान गंवा चुके हैं
  3. शिप्रा क्षेत्र का अर्जुन बड़ोद जिला का सबसे बड़ा 'डेथ ट्रैप' बनकर उभरा है, यहां हुए 29 हादसों में सबसे ज्यादा 19 लोगों की मौत हुई है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जिले की सड़कों पर रफ़्तार का रोमांच लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। पुलिस और ट्रैफिक एजेंसियों की तमाम कोशिशों के बावजूद सड़क हादसों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। एक

एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर जिले में ऐसे 31 ब्लैक स्पॉट (हादसा संभावित क्षेत्र) चिन्हित किए गए हैं, जहां साल 2023 से अब तक कुल 290 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में अब तक 239 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से 10 स्पॉट इतने खतरनाक हैं कि वहाँ से गुजरते वक्त जरा सी चूक सीधे मौत का सबब बन रही है।

अर्जुन बड़ोद सबसे खूनी मोड़, शहर से ज्यादा ग्रामीण हाईवे पर मौत का साया

आंकड़ों का विश्लेषण करें तो शिप्रा क्षेत्र का अर्जुन बड़ोद जिला का सबसे बड़ा 'डेथ ट्रैप' बनकर उभरा है। यहाँ हुए 29 हादसों में सबसे ज्यादा 19 लोगों की मौत हुई है।

चिंताजनक बात यह है कि चमकते शहरी रास्तों के मुकाबले ग्रामीण हाईवे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं। जिले के कुल 31 ब्लैक स्पॉट में से 16 शहर में और 15 ग्रामीण इलाकों में हैं। साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के आंकड़े भी इसी गवाही को पुख्ता करते हैं, जहाँ शहर में सड़क हादसों के कारण 10 मौतें दर्ज हुईं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या 12 रही।


सिर्फ रफ़्तार नहीं, सड़कों का 'खराब डिजाइन' भी जिम्मेदार

पुलिस विभाग के अनुसार, इन हादसों की वजह सिर्फ वाहनों की तेज गति नहीं है। सड़कों का त्रुटिपूर्ण डिजाइन, अचानक आने वाले खतरनाक कट, भारी वाहनों का अत्यधिक दबाव, अपर्याप्त ट्रैफिक मैनेजमेंट और कछुआ गति से चल रहे अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी इसके मुख्य कारण हैं।

अधिकारियों का दावा है कि शहर के 5 ब्लैक स्पॉट को पूरी तरह ठीक कर लिया गया है, और रालामंडल व अर्जुन बड़ोद जैसे व्यस्त क्षेत्रों में ब्रिज बनने के बाद हादसों में कमी आई है। हालांकि, मानपुर का भैरूघाट, सिमरोल और मांचल (इंदौर-अहमदाबाद हाईवे) जैसे पहाड़ी और संकरे रास्तों पर लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट्स (जैसे टनल, फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण) के अधूरे होने से खतरा लगातार बना हुआ है।

जिले के टॉप-5 सबसे खतरनाक 'ब्लैक स्पॉट'

स्थान (क्षेत्र) कुल हादसे कुल मौतें
1. अर्जुन बड़ोद (शिप्रा) 29 19
2. भैरूघाट, कालीकिराय (मानपुर) 19 15
3. देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड (खुड़ैल) 15 14
4. रालामंडल चौराहा 13 14
5. लवकुश चौराहा / कैलोद करताल 12 11

जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक सुधार नामुमकिन: जस्टिस सप्रे

सड़क सुरक्षा समिति के प्रमुख जस्टिस ए.एम. सप्रे ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट कहा है कि केवल सड़कों की इंजीनियरिंग दुरुस्त कर देने या सरकारी दावों से हादसों को शून्य पर नहीं लाया जा सकता। जब तक वाहन चालक खुद जिम्मेदार नहीं बनेंगे, ओवरस्पीडिंग पर लगाम नहीं लगाएंगे और रॉन्ग साइड ड्राइविंग जैसी जानलेवा आदतें नहीं छोड़ेंगे, तब तक मौत के इन आंकड़ों को थामना नामुमकिन होगा। हर नागरिक को हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमों का कड़ाई से पालन करना ही होगा।

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