
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में इन दिनों अजीब सा सन्नाटा है। हर तरफ आंसू और चीत्कार है। अधिकारियों, नेताओं की आवाजाही जारी है। मीडिया का जमावड़ा है, लेकिन रहवासियों के चेहरे का पानी उतरा हुआ है। उनके चेहरे पर दहशत साफ नजर आ रही है। हालत यह है कि एंबुलेंस का सायरन गूंजते ही लोग किसी अंजान आशंका के चलते घरों से बाहर निकल आते हैं। उन्हें यह सोचकर ही ग्लानि हो रही है कि जिस पानी को नर्मदा जल मानकर वे अब तक सेवन कर रहे थे, निगम की लापरवाही के चलते उसमें मल-मूत्र मिल रहा था। दूषित पानी अब तक 16 लोगों की जिंदगी लील चुका है।
अस्पतालों में सैकड़ों का उपचार अब भी चल रहा है। चिंता इस बात की है कि दो दर्जन से ज्यादा अब भी आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। 50 हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले भागीरथपुरा में शायद ही कोई घर होगा जिसमें रहने वाले इस बात को लेकर आशंकित न हो कि वो जो पानी पी रहे हैं वह पीने लायक है भी या नहीं।
जिन लोगों ने अपनों को खोया है, सरकार उन्हें क्षतिपूर्ति के रूप में दो-दो लाख रुपये दे रही है। इसे लेकर भी रहवासियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि शासन, प्रशासन इंसान की कीमत दो लाख रुपये लगाकर अपनी लापरवाही को ढांकने का प्रयास कर रहा है। व्यवस्था में सुधार के बजाय जिम्मेदार बरगला रहे हैं। भागीरथपुरा के नलों में अब भी दूषित पानी आ रहा है।
भागीरथपुरा निवासी प्रभुलाल नावरे 25 दिसंबर से रेसीडेंसी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। दूषित पानी की वजह से उल्टी-दस्त के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। बेटे सूरज ने बताया कि पिता का संक्रमण किडनी तक पहुंच गया है। डाक्टरों का कहना है कि बैक्टेरिया की वजह से ऐसा हुआ है। बकौल सूरज आज तक कोई जनप्रतिनिधि, अधिकारी उनके पिता की सुध लेने नहीं आया। वे जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम कर पिता का उपचार करवा रहे हैं।
क्षेत्र के निवासी सचिन सोलंकी का कहना है कि हम सालों से गंदे पानी की समस्या झेल रहे हैं। कई बार शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब जब क्षेत्र में मौत का तांडव चल रहा है, सरकार दावा कर रही है कि सब कुछ ठीक है, लेकिन ऐसा है नहीं। क्षेत्र में जो पानी बांटा जा रहा है वह अब भी दूषित है।
मां गोमती रावत को खो चुके राहुल की आंखों में आक्रोश के आंसू हैं। अव्यवस्था को कोसते हुए वे बताते हैं कि उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद मां का उपचार करवाया, लेकिन हम उन्हें बचा नहीं सके। मां की मौत के बाद नेताओं और अधिकारियों का आना-जाना जारी है। गुरुवार कैबिनेट मंत्री घर आए और आश्वासन दे गए थे कि जल्दी ही दो लाख रुपये का चेक भिजवाएंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। राहुल का कहना है कि सरकार व्यक्ति की जान की कीमत दो लाख रुपये लगा रही है। हम दो लाख रुपये देंगे तो क्या हमारा व्यक्ति वापस आ जाएगा।
सास तारारानी की तस्वीर की ओर देखते ही बहू सविता की आंखें भर आती हैं। भरे गले से वे बताती हैं कि हमें लगा कि उन्हें सामान्य उल्टी-दस्त है लेकिन यह पता नहीं था कि यह उल्टी-दस्त हमारे सिर से मां का साया ही छीन लेगा। दूषित पानी की वजह से तबीयत बिगड़ी, संक्रमण इतना तेजी से हुआ कि कुछ समझ पाते तब तक मां की मौत हो गई। शासन प्रशासन दो लाख रुपये की सहायता राशि देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं, लेकिन क्या किसी व्यक्ति की जान की कीमत लगाई जा सकती है।
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण शुक्रवार को 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान अरबिंदो अस्पताल में मृत्यु हो गई। अंतिम संस्कार मालवा मिल मुक्तिधाम में किया गया। इस घटना के बाद से भागीरथपुरा में मातम छाया हुआ है। लगातार हो रही मौतों के कारण रहवासी जिम्मेदारों को कोस रहे हैं। एंबुलेंस के सायरन सुनकर लोग डरने लगे हैं, जिससे कोराना काल की यादें ताजा हो गई हैं।
दूषित पानी के कारण गीता पत्नी राजू ध्रुवकर, निवासी भागीरथपुरा की तबीयत पिछले आठ-दस दिनों से खराब थी। उनकी देवरानी नीलम ध्रुवकर के अनुसार सबसे पहले उल्टी और दस्त की समस्या शुरू हुई। उन्हें पहले एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दो दिन बाद घर ले आए। दस्त बंद न होने के कारण 31 दिसंबर को उन्हें अरबिंदो अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां शुक्रवार को उनका निधन हो गया।
भांजी कोमल ने बताया कि दूषित पानी पीने के कारण उनके मामाजी राजू ध्रुवकर और बड़े भाई किशोर ध्रुवकर को भी पिछले आठ दिनों से पेट दर्द हो रहा है। खुद कोमल को भी लगातार पेट दर्द की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।