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एमपी के सरकारी स्कूलों की बदहाली... 1.15 लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त, 5000 भवन जर्जर और 10 हजार में बिजली गायब

शिक्षा सत्र शुरू हुए दो माह बीतने को आए हैं, लेकिन आज भी प्रदेश के विद्यार्थियों को मूलभूत और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रदेश में शिक्षक...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 21 Aug 2026 07:58:20 PM (IST)Updated Date: Fri, 21 Aug 2026 07:58:20 PM (IST)
एमपी के सरकारी स्कूलों की बदहाली... 1.15 लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त, 5000 भवन जर्जर और 10 हजार में बिजली गायब
कैग रिपोर्ट के हवाले से कोर्ट पहुंची स्कूलों की बदहाली।

HighLights

  1. MP के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हाई कोर्ट सख्त
  2. एमपी में 1.15 लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त
  3. कैग रिपोर्ट के हवाले से कोर्ट पहुंची स्कूलों की बदहाली

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शिक्षा सत्र शुरू हुए दो माह बीतने को आए हैं, लेकिन आज भी प्रदेश के विद्यार्थियों को मूलभूत और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रदेश में शिक्षकों के 40 प्रतिशत पद आज भी खाली हैं। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने शासन से कहा था कि वह बताए कि खाली पदों को भरने और स्कूलों की बदहाली दूर करने की क्या योजना है, लेकिन वह नहीं बता सकी। सरकारी वकील ने जवाब देने के लिए समय ले लिया। मामले में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

प्रदेश में शिक्षकों के 40 प्रतिशत पद खाली

हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका सेंधवा निवासी बीएल जैन ने अधिवक्ता अभिषेक तुगनावत के माध्यम से दायर की है। कहा है कि एक तरफ तो सबको शिक्षा का दावा किया जा रहा है दूसरी तरफ प्रदेश में शिक्षकों के 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं।


संविधान के अनुच्छेद 45 के अंतर्गत शिक्षा का अधिकार अधिनियम में 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को निश्शुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी राज्यों को दी गई है, लेकिन बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। कैग की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश की शिक्षा की गुणवत्ता बिगड़ने के साथ-साथ बुनियादी ढांचा भी ध्वस्त हो गया है।

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शिक्षकों के पद प्रदेश में

  • स्वीकृत - 2 लाख 89 हजार
  • खाली पड़े हैं - 1 लाख 15 हजार 678

ये हैं याचिका के साथ प्रस्तुत आंकडे

  • 83514 स्कूल भवन हैं प्रदेश में इनमें से 5000 स्कूल भवन जर्जर होकर बच्चों के लिए असुरक्षित हैं।
  • 3400 स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय तक नहीं हैं।
  • 10 हजार स्कूलों में आज भी बिजली नहीं है।
  • 1895 स्कूल प्रदेश में ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है।
  • 40 हजार स्कूलों में सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल नहीं है।
  • हजारों स्कूलों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है।
  • कई स्कूल आज भी झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं।
  • 59 हजार स्कूल प्रदेश में ऐसे हैं जहां कम्प्यूटर की सुविधा नहीं है।