यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 03, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Indore News: काठी नाच प्रस्तुति से रोशन हुई निमाड़ के भील क्रांतिकारियों की अमर गाथा
Indore News: ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई जल,जंगल, जमीन, संस्कृति और जनजाति समुदाय पर हो रहे भीषण अत्याचार के विरुद्ध थी।
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Tue, 03 May 2022 07:55:15 AM (IST)Updated Date: Tue, 03 May 2022 07:55:15 AM (IST)

Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रंगकर्म में रुचि रखने वालों के लिए शहर में नाटक का मंचन हुआ। अभिनव कला समाज के सभागृह में प्रयास 3डी रंगमंच समूह ने वीराज्ञात सीरीज के तहत अपना चौथा नाटक 'भील नायक' प्रस्तुत किया। यह नाटक निमाड़ क्षेत्र के गुमनाम आदिवासी क्रांतिकारी भीमा और खाज्या नायक की अमर गाथा पर आधारित था। इन्होंने तीन हजार आदिवासी जनजाति वीरों के साथ मिलकर 1857 की क्रांति में अपना अमूल्य योगदान दिया। जो अपने पारंपरिक हथियार यानी धनुष, तलवार, चाकू, छुरी और गिलोर के द्वारा सेंधवा से खानदेश तक फैले निमाड़ क्षेत्र की रियासत को सुरक्षित रखते थे। जिनकी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई जल,जंगल, जमीन, संस्कृति और जनजाति समुदाय पर हो रहे भीषण अत्याचार के विरुद्ध थी। जो 1857 के समय मराठा वीर तात्या टोपे से मुलाकात के बाद समुदाय से आगे बढ़ते हुए क्रांति राष्ट्रीय स्तर पर फैली और इसमें कई आदिवासी क्रांतिकारियों ने अपने प्राण गंवाए।
गुमनाम आदिवासी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हीं के निमाड़ क्षेत्र के लोक नृत्य काठी नाच को मंच पर साकार किया। जिसमें कलाकारों ने सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए भीलों की अमर गाथा को निमाड़ी बोली में संवादों का खूबसूरत गायन किया। साथ ही पारंपरिक तरीके से सेट डिजाइन किया। प्रस्तुति के दौरान जब लाइट चली गई तो इस अवसर को कलाकारों ने अलग ही अंदाज में खास बना दिया। कलाकारों ने नाटकीय अंदाज में दर्शकों से फ्लैश लाइट जलाने की अपील की और मंचन जारी रखा। नाटक हिंदी और निमाड़ी बोली में खेला गया। इसमें सभी कलाकारों ने सहज अभिनय किया।
नाटक का निर्देशन और लेखन वरुण जोशी ने किया। मंच पर भीमा और खाज्या नायक, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई के किरदार में दिव्यांश, आयुष, मोहित और चैतन्या ने उम्दा अभिनय किया। रोशन और राजा वाणी ने काठी नाच की सुंदर प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। कोरस में फैजान, हिमांशु, अरुण, संस्कार, सिद्धी, आकाश और रौनक रहे। आशुतोष ने संगीत दिया। यह नाटक रंगकर्मी राघव राज और ज्योति राघव के मार्गदर्शन में प्रस्तुत किया गया।