
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाकर दिखाने का संकल्प लिया था, वह हमने बना दिया। अन्य मंदिरों (काशी, मथुरा, भोजशाला) के लिए अब समाज आगे आए। इनसे जुड़े अदालतों में चल रहे मामलों को वहीं रहने देना चाहिए। न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए।
इंदौर में आयोजित संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के समापन पर होसबाले ने मीडिया से चर्चा में जेन-जी आंदोलनों, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, वोट चोरी के आरोपों और आरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संघ का दृष्टिकोण रखा।
युवाओं के आंदोलनों और रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन के नाम पर हो रहे प्रदर्शनों पर होसबाले ने कहा कि युवाओं को भड़काने के पीछे कुछ आंतरिक और बाहरी शक्तियों का षड्यंत्र हो सकता है। समाज में अशांति फैलाकर और हिंसा के माध्यम से बदलाव लाने का प्रयास राष्ट्र और समाज हित में नहीं है। सत्ता परिवर्तन का रास्ता लोकतांत्रिक हो और यह चुनाव के माध्यम से ही होना चाहिए। युवाओं की वास्तविक समस्याओं और मांगों का प्रशासनिक स्तर पर समाधान किया जाना चाहिए। उनसे संवाद करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन के समय हम भी जेन-जी थे। गैर नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना गंभीर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों के संदर्भ में होसबाले ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है और उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, तो यह गंभीर विषय है। इसका संबंध केवल चुनावी व्यवस्था से नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से भी है।
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उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को आवश्यक बताते हुए कहा कि समय-समय पर सूची का पुनरीक्षण होना चाहिए। इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। समान अवसर मिलने तक जारी रहे आरक्षण आरक्षण के मुद्दे पर होसबाले ने स्पष्ट किया कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को जब तक समान अवसर नहीं मिलते, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। आरक्षण पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसका उपयोग समाजहित में किया जाना चाहिए और जिन लोगों को इसकी आवश्यकता है, उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए।
बता दें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में दो से चार नवंबर तक इंदौर के डेली कालेज में हुई। इसमें देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हुए। सरसंघचालक डा. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, छह सह सरकार्यवाह और अखिल भारतीय पदाधिकारियों ने भाग लिया।