Taste Of Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जरूरी नहीं कि किसी व्यंजन में स्वाद कई तरह के मसाले या बहुत सी सामग्री डालने पर ही आए। कई बार सादगी का स्वाद भी सिर चढ़कर बोलता है और ऐसे ही व्यंजन हैं बटाटा भाजी और साबूदाना वड़ा। यह दोनों ही उपवास के खालिस लजीज व्यंजन। एक में गुजरात और महाराष्ट्र का मिलाजुला स्वाद तो दूसरे में मालवी लज्जत का अंदाज। खट्टा, मीठा और तीखा तीनों ही प्रमुख स्वाद को अपने में समेटे यह व्यंजन इंदौरियों को व्रत में भी खाने-खिलाने की मनुहार का मौका दे ही देते हैं।

बटाटा भाजी दिखने में बेशक साधारण दिखे लेकिन उसका जायका ऐसा कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक को अपना दीवाना बना दे। चाहे तीखा पसंद करने वाले हों या नमकीन में भी मीठे के शौकीन। उबले आलू की इस भाजी को घी में जीरा और हरीमिर्च का छौंक लगाकर बनाया जाता है जिसमें कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन की पूर्ति पिसे हुए मूंगफली दाने करते हैं। सेंधा नमक, शकर, नीबू से इसका स्वाद बढ़ाया जाता है तो बारीक कटा हुआ हरा धनिया इसकी रंगत और गंध दोनों में ही इजाफा कर देता है।

यह बटाटा भाजी शहर में करीब 40 वर्षों से बनती आ रही है और इसे बनाने का काम प्रशांत जोशी तब से कर रहे हैं जब उनके पिताजी दत्तात्रेय और चाचा पुरुषोत्तम ने इस व्यंजन से शहर को परिचित कराया था। 1949 से शहर में संचालित हो रहे प्रशांत फूड के संचालक प्रशांत बताते हैं कि वटाटा भाजी का असली स्वाद उसमें डाली जाने वाली न्यूनतम सामग्री ही है।

इसी तरह कम सामग्री की मदद से साबूदाना वड़ा बनाया जाता है। उबले आलू, भिगोए हुए साबूदाने, पिसे हुए मूंगफली दाने, हरीमिर्च और सेंधा नमक से वड़े तैयार किए जाते हैं। उसमें करारापन लाने के लिए थोड़ा सा सिंघाड़े का आटा मिलाया जाता है। मध्यम आंच पर तले इन वडों को विशेष तरह की चटनी के साथ परोसा जाता है। अमूमन साबूदाना वड़ा हरा धनिया और हरीमिर्च की चटनी के साथ ही दिया जाता है लेकिन यहां इस चटनी को इंदौरीपन देने के लिए उसमें दही का भी समावेश किया गया है। हरीमिर्च और हरे धनिये को पीसकर उसे दही में मिलाया जाता है और फिर इस दही चटनी को गर्मागरम वड़े के साथ परोसा जाता है।

फोटो: प्रफुल्ल चौरसिया, आशू

Posted By: Sameer Deshpande

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