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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 17, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Medical Hub Indore: तबादले का भय नहीं, इसलिए मनमानी करते हैं इंदौर के डाक्टर

Medical Hub Indore: स्वशासी के नियम बने फायदे का सौदा, शहर में करते हैं निजी प्रैक्टिस। मेडिकल कालेज स्वशासी होने की वजह से लापरवाही साबित होने के बाव...और पढ़ें

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Sat, 17 Dec 2022 08:54:26 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Dec 2022 09:20:32 AM (IST)
Medical Hub Indore: तबादले का भय नहीं, इसलिए मनमानी करते हैं इंदौर के डाक्टर

Medical Hub Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मेडिकल कालेजों के अस्पतालों में डाक्टरों के ओपीडी में समय पर नहीं पहुंचने के पीछे एक बड़ी वजह यह है कि इन डाक्टरों को इंदौर से बाहर ट्रांसफर किए जाने का भय ही नहीं रहता। दरअसल, एमजीएम मेडिकल कालेज एक स्वशासी संस्था है। नियमानुसार स्वशासी संस्था के डाक्टरों को शहर से बाहर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इस नियम का फायदा उठाकर कालेज के शिक्षक (डाक्टर) सालों साल इंदौर में बने रहते हैं। वे समय पर ओपीडी में पहुंचने के बजाय सुबह निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को देखने निकल जाते हैं। नियमानुसार सिर्फ वे ही डाक्टर निजी अस्पतालों में मरीजों को देख सकते हैं जो नान प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) नहीं लेते हैं, लेकिन यह जानकारी भी सामने आई है कि कई डाक्टर ऐसे भी हैं जो एनपीए लेने के बावजूद निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे हैं।

नईदुनिया की टीम गुरुवार सुबह 9 से 10 बजे के बीच शहर के कई अस्पतालों की सेहत जांचने मैदान में उतरी थी। पता चला कि एमवाय अस्पताल, शासकीय कैंसर अस्पताल, एमटीएच अस्पताल सहित ज्यादातर अस्पतालों में डाक्टर समय पर नहीं पहुंचते हैं। इस संबंध में जब नईदुनिया ने मेडिकल कालेज के डीन से चर्चा की तो पता चला कि मेडिकल कालेज स्वशासी होने की वजह से लापरवाही साबित होने के बावजूद डाक्टरों को शहर के बाहर नहीं ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।


वर्ष 1997 में बना स्वशासी

एमजीएम मेडिकल कालेज 1997 से स्वशासी संस्था के रूप में काम कर रहा है। उस वक्त कालेज के शिक्षकों से कहा गया था कि वे स्वशासी संस्था और शासन दोनों में से किसी एक विकल्प को चुन सकते हैं। ज्यादातर शिक्षकों ने स्वशासी संस्था का विकल्प चुना था, क्योंकि स्वशासी संस्था के डाक्टरों को शहर के बाहर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज के डाक्टरों के ट्रांसफर इंदौर से इंदौर में ही होते हैं। कालेज में नए शिक्षकों की नियुक्ति भी स्वशासी संस्था के अंतर्गत ही की जा रही है।

जिन डाक्टरों की नियुक्ति स्वशासी संस्था के तहत है, उन्हें शहर से बाहर नियुक्त नहीं किया जा सकता। एमजीएम मेडिकल कालेज में गिनती के डाक्टर हैं जो शासन के अंतर्गत हैं, स्वशासी संस्था में नहीं।

-डा. संजय दीक्षित, डीन, एमजीएम मेडिकल कालेज, इंदौर

मालवा-निमाड़ में सख्ती

अस्पतालों में वक्त पर नहीं पहुंचने वाले डाक्टरों को थमाए नोटिस

चेतावनी भी दी : ऐसा नहीं चलेगा... सभी को वक्त पर आना होगा, अब शिकायत नहीं मिलनी चाहिए

मालवा-निमाड़ के सरकारी अस्पतालों में वक्त पर नहीं पहुंचने वाले डाक्टर और कर्मियों पर सख्ती शुरू हो गई है। बुधवार को नईदुनिया ने मौकेपर जाकर लेटलतीफी केमामले उजागर किए थे, जिसकेबाद कई जिलों में डाक्टरों को नोटिस देकर जवाब मांगा है, वहीं कई को चेतावनी देने केसाथ समय पर अस्पताल पहुंचने केनिर्देश्ा दिए गए हैं। बड़वानी में सिविल सर्जन ने वक्त पर जिला अस्पताल नहीं पहंुचने वाले सभी डाक्टरों नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब देने को कहा है। खंडवा में प्रभारी डीन डाक्टर नजीम सिद्दीकी ने सभी विभागों के अध्यक्ष से डाक्टरों के समय पर आने की जानकारी मांगी है। बुरहानपुर में सिविल सर्जन डा. प्रदीप मोजेस ने सभी डाक्टरों को नोटिस जारी कर देरी से आने का जवाब मांगा है। धार में जिला अस्पताल की ओपीडी शुक्रवार को नियमित समय पर शुरू हुई। बावजूद सिविल सर्जन ने सभी डाक्टरों को सख्त निर्देश दिए।