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जिनकी जिम्मेदारी कानफोडू शोर को रोकना है, उन्हें यह सुनाई नहीं देता, इंदौर हाई कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी

हमने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद याचिका का निराकरण का मन बना लिया था, लेकिन रात में पता चला कि हर तरफ से बहुत तेज आवाजें आ रही थीं। कोर्ट ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 08:28:56 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 08:28:56 PM (IST)
जिनकी जिम्मेदारी कानफोडू शोर को रोकना है, उन्हें यह सुनाई नहीं देता, इंदौर हाई कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
इंदौर हाई कोर्ट ने जारी किए निर्देश। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. कोर्ट ने शासन से कहा साइलेंट जोन के बारे में समाचारों के माध्यम से जनता को बताएं
  2. लोग शिकायत कहां कर सकते हैं इसकी भी जानकारी दो
  3. कहा- शोर से 7 वर्षीय बच्ची की जान चली गई, लेकिन किसी को सुनवाई नहीं दिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : हमने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद याचिका का निराकरण का मन बना लिया था, लेकिन रात में पता चला कि हर तरफ से बहुत तेज आवाजें आ रही थीं। कोर्ट से घर लौटते समय देखा कि कई जगह पर लाउड स्पीकर सीमा को पार कर बज रहे थे।

सुबह समाचार पत्र में पढ़ा कि सात वर्षीय बच्ची की स्कूल में मौत हो गई, वजह पास से गुजर रहे एक जुलूस के स्पीकर्स से निकली तेज आवाज थी। प्रशासन के अधिकारियों को, जिनकी जिम्मेदारी कानफोडू शोर रोकना है, उन्हें यह सुनाई नहीं देता। उन्होंने कोर्ट को समझाने का प्रयास किया कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन हकीकत कुछ और है। हम शासन को निर्देश देते हैं कि वह ध्वनि प्रदूषण नियम और मप्र कोलाहल नियंत्रण अधिनियम का पालन सुनिश्चित करें। कानून का खुलेआम उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करें।


यह हाई कोर्ट के उस आदेश के अंंश हैं जो शहर में ध्वनि प्रदूषण की वास्तविकता बता रहा है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई द्वारा जारी इस आदेश ने शासन, प्रशासन के ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किए जा रहे दावों की कलाई खोल दी है।

कोर्ट ने शासन से कहा है कि वह समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी कर आमजन को बताए कि शहर में किन क्षेत्रों को साइलेंट जोन (शांत क्षेत्र) घोषित किए गए हैं। आमजन को यह भी बताया जाए कि वह ध्वनि प्रदूषण की शिकायत कहां और किन नंबरों पर कर सकती है। शहर के किन महत्वपूर्ण स्थानों को साइलेंट जोन में शामिल किया जा सकता है इस बारे में जनता से राय ली जाए। शासन एक सप्ताह के भीतर ध्वनि प्रदूषण और शोर को रोकने के लिए किए गए कार्यों को लेकर नई रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।

यह है मामला

शहर में बढ़ते शोर को लेकर वर्ष 2023 में अमिताभ उपाध्याय, चिन्मय मिश्र ने एडवोकेट अभिनव धानोडकर के माध्यम से जनहित याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें धार्मिक स्थलों सहित अन्य स्थानों पर तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जाने से रहवासियों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया है।

कहा है कि तेज शोर से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कानून तो हैं, लेकिन पालन नहीं होता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि शासन कानून का सख्ती से पालन कराए। याचिका में मंगलवार को बहस हुई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था जो गुरुवार को जारी हुआ।

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