
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : कम बरसात के बाद अब गर्मियों में जलसंकट की आशंका भांप कर नगर निगम तैयारियों में जुट गया है। शहर में ताजे पानी की मांग के दबाव घटाने के लिए अब सीवेज से निकले उपचारित पानी को बड़े पैमाने पर दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू हो गई है।
चार स्थानों पर कुल 30 एमएलडी क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट बनाएं जाएंगे। इनसे प्रतिदिन करीब 3 करोड़ लीटर उपचारित पानी उपलब्ध होगा। जलम अमृत परियोजना से इसके संग्रहण और वितरण का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। योजना में 133 उद्यानों को उपचारित पानी से जोड़ने और शहर के 22 जोन में 162.03 किमी सीवर लाइन के पुनर्वास या प्रतिस्थापन का प्रस्ताव शामिल किया गया है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में बुधवार को सिटी बस कार्यालय में हुई अमृत प्रोजेक्ट और सीवरेज विभाग की समीक्षा बैठक में इन योजनाओं के साथ ड्रेनेज कार्यों, नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), तालाबों में जल संग्रहण, कान्ह-सरस्वती नदी की सफाई और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की समीक्षा की गई।
बैठक में जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा, पार्षद योगेश गेंदर, अपर आयुक्त आशीष कुमार सहित विभागीय अधिकारी और इंजीनियर मौजूद रहे।नगर निगम की अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) परियोजना के तहत चार स्थानों पर टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव है।
इन प्लांटों से उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्यानों की सिंचाई, सड़क धुलाई, निर्माण कार्य, सीवर सफाई और धूल नियंत्रण जैसे कामों में किया जा सकेगा। सरकारी भवनों, अस्पतालों, एयरपोर्ट, मेट्रो और औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी आपूर्ति की संभावनाएं तलाशने की योजना है।
उद्देश्य यह है कि जहां पीने योग्य पानी की जरूरत नहीं है, वहां नर्मदा सहित अन्य ताजे जल स्रोतों का पानी खर्च न हो। परियोजना के तहत स्कीम नंबर 78 में 30 लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक और कबिटखेड़ी एसटीपी परिसर में 15 लाख लीटर क्षमता का ग्राउंड स्टोरेज रिजर्वायर बनाने का भी प्रस्ताव है। इसके साथ 21.59 करोड़ रुपये से पंपिंग व्यवस्था और वितरण पाइपलाइन विकसित की जाएगी।
प्रस्तावित नेटवर्क से निपानिया, बॉम्बे हॉस्पिटल क्षेत्र, महालक्ष्मी नगर, देवास नाका और न्यू लोहा मंडी सहित चिन्हित इलाकों तक उपचारित पानी पहुंचाने की योजना है। परियोजना दस्तावेज में नेटवर्क की डिजाइन लंबाई 41.36 किमी है।
योजना में कुल 133 उद्यानों को उपचारित पानी से जोड़ने का लक्ष्य है। इनमें 23 मौजूदा और 110 नए उद्यान शामिल हैं। इसके अलावा 30 हाइड्रेंट स्थापित करने का प्रस्ताव है। उद्यानों की सिंचाई में उपचारित पानी का इस्तेमाल बढ़ने से ताजे पानी की बचत हो सकती है। इसके लिए अलग वितरण व्यवस्था, गुणवत्ता की नियमित जांच और उपयोग के स्पष्ट मानक जरूरी होंगे। सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शहर के 22 जोन में सीवर लाइनों के पुनर्वास और प्रतिस्थापन की योजना भी बनाई जा रही है।
यह भी पढ़ें- इंदौर में गहराया जलसंकट, बिजली फॉल्ट से नर्मदा पंप बंद, शहर में बुधवार को 73 टंकियों से जलापूर्ति रहेगी प्रभावित