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इंदौर-खंडवा रेल लाइन पर धीमी होगी ट्रेन, 20-30 किमी की रफ्तार; 16 सुरंगों और अंडरपास से सुरक्षित रहेंगे तेंदुए-बाघ

इंदौर-खंडवा नई रेल लाइन के वन क्षेत्र में ट्रेनों की गति 20-30 किमी प्रति घंटा रखने का सुझाव है। वन्यजीवों के लिए सुरंग, अंडरपास और दीवारें बनेंगी।

By Kapil NileyEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 10:19:13 AM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 10:19:13 AM (IST)
इंदौर-खंडवा रेल लाइन पर धीमी होगी ट्रेन, 20-30 किमी की रफ्तार; 16 सुरंगों और अंडरपास से सुरक्षित रहेंगे तेंदुए-बाघ
इंदौर-खंडवा रेल लाइन पर धीमी होगी ट्रेन। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. वन क्षेत्र में ट्रेनों की गति 20-30 किमी प्रति घंटा रहेगी।
  2. परियोजना में करीब 1.34 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है।
  3. 20 किलोमीटर क्षेत्र में 16 सुरंगें बनाई जाएंगी।

कपिल नीले, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : जंगल के बीच से जब ट्रेन गुजरेगी तो उसकी रफ्तार कम रहेगी। पटरी के आसपास अचानक कोई तेंदुआ, हिरण या अन्य वन्यजीव आ जाए तो उसे बचने का मौका मिले। इसके लिए ट्रेन की गति सामान्य से कम रखने का सुझाव दिया गया है।

यह व्यवस्था इंदौर-खंडवा के बीच बनने वाली नई रेल लाइन में देखने को मिलेगी। विकास के साथ जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। वन विभाग ने पश्चिम रेलवे को सुझाव दिया है कि वन क्षेत्र में ट्रेनों की रफ्तार 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी जाए।


नई रेल लाइन के निर्माण के लिए जंगल में आने वाले बाधक पेड़ों की कटाई का काम अक्टूबर से शुरू होने की तैयारी है। प्रोजेक्ट के लिए करीब 454 हेक्टेयर वन भूमि लगेंगी। अकेले इंदौर वनमंडल की 407 और खरगोन वनमंडल की 46 हेक्टेयर जमीन शामिल है। निर्माण के दौरान करीब 1.34 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। अक्टूबर से इन पेड़ों को कटाने का काम शुरू किया जाएगा, जो चार से पांच चरण में पूरा होगा।

पटरी पर आने से पहले ही रोकेंगे वन्यजीवों को

  • रेलवे ट्रैक के दोनों ओर मजबूत और ऊंची दीवारें बनाने की योजना है। इनका काम वन्यजीवों को सीधे पटरी तक पहुंचने से रोकना होगा। लेकिन जंगल में रहने वाले जानवरों की आवाजाही सिर्फ एक दिशा में नहीं होती। तेंदुए और अन्य वन्यजीव अपने भोजन, पानी और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में लगातार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाते हैं।

  • इसी वजह से दीवारों के साथ अंडरपास और सुरंगों का भी प्रावधान किया जा रहा है। इन रास्तों से जानवर बिना पटरी पर आए रेलवे लाइन के एक तरफ से दूसरी तरफ जा सकेंगे। यानी ट्रैक उनके रास्ते में आएगा, लेकिन उनकी आवाजाही को पूरी तरह रोकेगा नहीं।
  • 20 किमी में बनेंगी 16 सुरंगें

    • रेल मार्ग के करीब 20 किलोमीटर हिस्से में 16 सुरंगें बनाई जाएंगी। बड़िया से बेका के बीच 4.1 किलोमीटर, चोरल से मुख्यतियार बलवाड़ा के बीच 2.2 किलोमीटर और राजपुर के पास 1.6 किलोमीटर लंबी सुरंगें प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 12.1 किलोमीटर हिस्से में 13 छोटी सुरंगें बनाई जाएंगी।
    • रेलवे कुछ स्थानों पर 30-30 मीटर लंबे वायडक्ट भी बनाएगा। इससे करीब 17 हजार पेड़ों को बचाने में मदद मिलेगी। वहां ट्रैक का डिजाइन ऐसा रखा जाएगा कि कम से कम पेड़ों को नुकसान पहुंचे।

    तेंदुए और बाघ का बढ़ा मूवमेंट

    इंदौर वनमंडल में तेंदुओं की संख्या अब 110 से अधिक हो चुकी है। वहीं महू-चोरल के जंगल में इन दिनों बाघ का मूवमेंट भी है। इसके अलावा जंगल में कई दूसरे वन्यजीव लगातार आवाजाही करते हैं। ऐसे में नई रेल लाइन पर वन्यजीवों की सुरक्षा को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

    रातापानी प्रोजेक्ट से लिया सबक

    रातापानी क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की मौत की घटनाओं से भी वन विभाग ने सबक लिया है। इसी कारण इंदौर-खंडवा रेल लाइन पर दुर्घटना होने के बाद इंतजार करने के बजाय पहले से सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने पर जोर है।

    कटेंगे पेड़ तो दुर्लभ प्रजातियां भी लगेंगी

    निर्माण के दौरान जिन पेड़ों की कटाई होगी, उसके बदले रेलवे को दूसरी जगह पौधरोपण करना होगा। वन विभाग ने इस बार पौधरोपण में करीब 5 प्रतिशत दुर्लभ और औषधीय प्रजातियों को शामिल करने की शर्त रखी है।

    अधिक है वन्यजीवों की आवाजाही

    महू-खंडवा रेल प्रोजेक्ट अहम है। जंगल से निकलने वाले रेल मार्ग को जानवरों के लिए भी सुरक्षित बनाना है। इसके लिए वन विभाग की तरफ से रेलवे को सुझाव दिया है कि जंगल से निकलने के दौरान ट्रेन की स्पीड कम रखी जाए, क्योंकि इंदौर-बडवाह में वन्यजीवों की आवाजाही अधिक है। लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल

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