
उदय प्रताप सिंह, इंदौर Enviroment Friendly IIT Indore। आइआइटी इंदौर के सिमरोल परिसर में पर्यावरण हितैषी आडिटोरियम तैयार किया जा रहा है। यहां पर मध्य भारत का सबसे बड़ा आडिटोरियम है। 130 करोड़ रुपये की लागत से 2500 दर्शक क्षमता का आडिटोरियम बनाया जा रहा है। इसके अतिरक्ति यहां पर 500 दर्शक क्षमता के दो व 300 दर्शक क्षमता के दो अन्य आडिटोरियम भी बनाए जा रहे है। यहां बनाए जाने वाले आडिटोरियम की खूबी यह है कि इनमें इस तरह की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है कि ऊर्जा की बचत हो।
यहां के आडिटोरियम में उपयोग किए जाने वाले एसी में बारिश के पानी व सीवरेज, वाश बेसिन के ट्रीट किए हुए पानी का उपयोग किया जाएगा। यदि तीन घंटे आडिटोरियम का उपयोग किया जाएगा तो उसमें करीब 10 हजार लीटर ट्रीट किया हुआ पानी उपयोग होगा। इस आडिटोरियम को दिल्ली की एजेंसी तैयार कर है और इसका वस्तुविद कंसल्टेंसी इंदौर की एके ए कंसल्टेंट (इंडिया) प्रालि कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
आर्किटेक्ट संजय गोयल के मुताबिक इस आडिटोरियम को इस तरह बनाया जा रहा है जिससे की ऊर्जा की बचत हो सके। आडिटोरियम में जो इंतजाम किए जा रहे है उससे 15 से 20 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होगी। यदि तीन घंटे आडिटोरियम चालू रहेगा तो 70 से 80 बिजली की यूनिट प्रतिघंटे खर्च होगी और करीब एक हजार रुपये का बिल होगा। इससे तीन घंटे में करीब 500 रुपये की बचत मौजूदा सिस्टम से होगी।

आडिटोरियम को ठंडा रखने व गर्मी कम करने के लिए भी विशेष इंतजाम
आर्किटेक्ट संजय गोयल के मुताबिक पहले के समय आडिटोरियम बनाने के सामान्य लाइट का स्टेज उपयोग पर होता था। यहां के मंच पर एलईडी लाइन का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में पहले आडिटोरियम में जिन लाइटों का उपयोग किया जाता था उसके मुकाबले बिजली के खर्च में 50 फीसद की बचत होगी। एयरकंडीशन पर लोड कम हो इसके लिए आडिटोरियम में बाहर की ओर डीजीयू ग्लास यूनिट का उपयोग किया है। इसका फायदा यह होगा कि यदि बाहर तापमान 40 डिग्री इस ग्लास के कारण बिना एसी चलाए भी तापमान अंदर की ओर 30 से 32 डिग्री होगा।
सामान्यत: अन्य आडिटोरियम की छत जीआई और स्टील स्ट्रक्चर से बनाई जाती है लेकिन इस आडिटोरियम की आरसीसी की छत बनाई जा रही है। इससे गर्मी में आडिटोरियम का तापमान कम होगा और एसी की कूलिंग पर असर पड़ेगा। इसके अलावा यहां पर सेपरेट डक्टिंग बनाई जा रही है जिससे की बाहर की ताजी हवा को अंदर लाया जा सकेे। ऐसे में ठंड के समय इसका उपयोग कर आडिटोरियम को ठंडा करने में मदद ली जा सकेगी। इसके अलावा बाहर की शुद्ध हवा भी अंदर आएगी।
इसके अलावा आडिटोरियम की छत पर सोलर पैनल लगाए जा रहे है जिससे चार से पांच किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा। इसका उपयोग आडिटोरियम के अंदर की लाइटों में होगा। आडिटोरियम के छोटे कमरों व बेक स्टेज में वीआरएफ तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यानि जितनी जरुरत होगी उतना ही एसी चलेगे। इसके अलावा ग्रीन रुम के 10 कमरों में सिंगल यूनिट एसी आपरेट होगा। इससे हर कमरे में एसी मशीन लगाने की जरुरत नहीं होगी।